शिक्षा के नाम पर वसूली या सिस्टम की चुप्पी?

Spread the love

“शिक्षा के नाम पर वसूली या सिस्टम की चुप्पी? CMS पर उठे गंभीर सवाल”। ।
लखनऊ। राजधानी में शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले प्रतिष्ठित संस्थान City Montessori School (सीएमएस) को लेकर अभिभावकों में गहरी नाराज़गी और असंतोष सामने आ रहा है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, स्कूल की विभिन्न शाखाओं में री-एडमिशन फीस, अतिरिक्त शुल्क, कॉपी-किताब, ड्रेस और अन्य मदों के नाम पर अभिभावकों पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ाया जा रहा है।
अभिभावकों का आरोप है कि शिक्षा सेवा का माध्यम होने के बजाय अब यह पूरी तरह व्यावसायिक स्वरूप लेती जा रही है, जहां योजनाबद्ध तरीके से शुल्क वसूली की जा रही है। स्थिति यह है कि अभिभावक स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं और उनके सामने कोई स्पष्ट विकल्प भी नहीं बचता।
मीडिया मैनेजमेंट पर भी उठे सवाल
सूत्र बताते हैं कि जब-जब शुल्क वसूली अपने चरम पर होती है, उसी समय राजधानी के कृष्णा नगर स्थित सीएमएस ऑडिटोरियम में बड़े स्तर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस और कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन आयोजनों में नामी हस्तियों और अतिथियों को बुलाया जाता है, जिससे मीडिया का ध्यान अन्य मुद्दों की ओर आकर्षित हो जाए।
बताया जा रहा है कि पत्रकारों को आमंत्रित कर भोजन, छोटे उपहार और फोटो अवसर प्रदान किए जाते हैं, जिससे वास्तविक मुद्दों—जैसे फीस वृद्धि और अभिभावकों की समस्याएं—पर सवाल कम उठ पाते हैं। हालांकि यह भी सच है कि पत्रकारिता का मूल उद्देश्य जनहित के मुद्दों को प्रमुखता देना है, न कि सतही आकर्षण में उलझ जाना।
पत्रकारों के साथ व्यवहार पर भी प्रश्न
कुछ पत्रकारों का कहना है कि आयोजनों में चयनित लोगों को ही विशेष महत्व दिया जाता है, जबकि दूर-दराज से आने वाले अन्य पत्रकारों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार की शिकायतें भी सामने आई हैं।
पुराने समय का हवाला देते हुए कई लोग कहते हैं कि जब संस्थापक Jagdish Gandhi सक्रिय और जीवित थे , तब मीडिया के साथ व्यवहार अधिक संतुलित और सम्मानजनक माना जाता था। वर्तमान व्यवस्था में उस संतुलन की कमी महसूस की जा रही है।
प्रशासनिक चुप्पी पर उठे सवाल
सबसे बड़ा प्रश्न प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर खड़ा हो रहा है। अभिभावकों का कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही है। सवाल यह भी उठता है कि क्या प्रभावशाली संबंधों के चलते जिम्मेदार अधिकारी कठोर कदम उठाने से बच रहे हैं?
शिक्षा बनाम व्यवसाय
विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा एक सेवा है, न कि लाभ कमाने का माध्यम। यदि स्कूलों में शुल्क संरचना पारदर्शी नहीं होगी और अभिभावकों पर अनावश्यक दबाव बनाया जाएगा, तो यह व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

यह पूरा मामला केवल एक संस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की व्यापक चुनौती को दर्शाता है। जरूरत इस बात की है कि
अभिभावकों को आने वाली समस्याओं की निष्पक्ष जांच हो
शुल्क निर्धारण में पारदर्शिता लाई जाए
मीडिया अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता दे
और प्रशासन निष्पक्ष होकर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करे
सूत्रों के हवाले से सामने आई इन जानकारियों ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या शिक्षा व्यवस्था में बढ़ती व्यावसायिकता पर समय रहते अंकुश लगाया जा सकेगा, या अभिभावक यूँ ही आर्थिक दबाव झेलते रहेंगे?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *