लखनऊ में डी.जी. यादव के “न्यू पब्लिक इन्टर कॉलेज एवं स्कूल”

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लखनऊ में डी.जी. यादव के “न्यू पब्लिक इन्टर कॉलेज एवं स्कूल” की चार शाखाओं पर गंभीर आरोप, सूत्रों के हवाले से बड़ा खुलासा। ।
लखनऊ। राजधानी में संचालित New Public School एवं इंटर कॉलेज की चार प्रमुख शाखाओं को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। सूत्रों द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार ये सभी संस्थान डी.जी. यादव के प्रबंधन से जुड़े बताए जा रहे हैं। जिन शाखाओं का मामला सामने आया है, वे हैं
कृष्णा नगर, कानपुर रोड स्थित इंटर कॉलेज
श्री कृष्णा विहार, रायबरेली रोड स्थित स्कूल
न्यू श्रीनगर, सिंगार नगर, आलमबाग स्थित इंटर कॉलेज
देवपुर पारा, राजाजीपुरम स्थित स्कूल
सूत्रों के मुताबिक इन चारों शाखाओं में शासन-प्रशासन के निर्देशों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है और अभिभावकों से मनमाने तरीके से शुल्क वसूला जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, Allahabad High Court के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद—जिनमें अनावश्यक फीस वसूली, री-एडमिशन शुल्क और कॉपी-किताबों के नाम पर अतिरिक्त धन लेने पर रोक लगाई गई है—इन संस्थानों में कथित तौर पर यह सब जारी है।
वहीं प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath तथा शिक्षा विभाग द्वारा भी सार्वजनिक रूप से कहा गया है कि किसी भी प्रकार की लूट-खसोट बर्दाश्त नहीं की जाएगी, लेकिन सूत्रों के अनुसार इन शाखाओं में इसका कोई असर देखने को नहीं मिल रहा है।
प्रशासन पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। सूत्रों का कहना है कि
District Inspector of Schools (DIOS)
Basic Shiksha Adhikari (BSA) एवं अन्य संबंधित अधिकारी
अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पाए हैं। आखिर इसके पीछे क्या कारण हैं लापरवाही, दबाव या कोई अन्य पहलू यह जांच का विषय बन गया है।
खुली तानाशाही का आरोप
सूत्रों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार चारों शाखाओं में “खुली तानाशाही” जैसा माहौल बताया जा रहा है,जहां न तो सरकारी आदेशों का भय है और न ही किसी कार्रवाई का असर।
मांग तत्काल सख्त कार्रवाई
स्थानीय स्तर पर उठ रही आवाजों के अनुसार
सभी शाखाओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए
अवैध वसूली तत्काल रोकी जाए
दोषी प्रबंधन, विशेषकर डी.जी. यादव, पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए

यदि सूत्रों द्वारा लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला न केवल सरकारी आदेशों की अवहेलना है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस पूरे प्रकरण पर क्या रुख अपनाता है और अभिभावकों को न्याय कब तक मिलता है।

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