बदलाव ने जारी की “लखनऊ में भिक्षावृत्ति में लगे लोगों की स्थिति: उपेक्षा और समावेश 2024–25” रिपोर्ट
– एक समावेशी समाज की ओर बड़ा कदम
लखनऊ, 12 जुलाई 2025 — बदलाव द्वारा आज लखनऊ में भिक्षावृत्ति में संलिप्त लोगों की स्थिति पर आधारित सर्वेक्षण के बाद तैयार की गई महत्वपूर्ण रिपोर्ट “उपेक्षा और समावेश 2024–25” का विमोचन मुख्य अतिथि माननीय श्री असीम अरूण जी, मंत्री समाज कल्याण विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार, जे.राम (उपनिदेशक समाज कल्याण), के.एल. गुप्ता (उपनिदेशक समाज कल्याण), श्री अंजनी सिंह (जिला समाज कल्याण अधिकारी-लखनऊ), प्रो. मो0 तारिक(संस्थापक, द कोशिश ट्रस्ट), प्रोफेसर विवेक कुमार सिंह (डीन-सोशल साइंस स्टडीज, प्रो0 राजेन्द्र सिंह रज्जू भैया विश्वविद्यालय प्रयागराज) द्वारा किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि माननीय मंत्री जी, विशिष्ठ अतिथि एवं अतिथि गणों द्वारा दीप प्रज्जवलन कर उन लाभार्थियों की कहानियों से हुई जिन्होंने बदलाव संस्था के सहयोग से भिक्षावृत्ति से निकलकर आत्मनिर्भर जीवन की ओर कदम बढ़ाया। नरेंद्र, नरेश, माया, राहुल और कपिल जैसे उदाहरणों ने अपनी भावुक कहानियाँ साझा कीं।
श्री संजय वर्मा (प्रोग्राम मैनेजर, बदलाव) ने रिपोर्ट के चार मुख्य उद्देश्यों के साथ साथ सर्वे के आंकड़े बताये:
33% के पास कोई पहचान पत्र नहीं है
52% झुग्गियों में रहते हैं
48% लोग नशे की लत से जूझ रहे हैं
80% अशिक्षित हैं
49% लोग आर्थिक संकट के कारण भिक्षावृत्ति में आए
19% पारिवारिक विघटन के कारण
75% के पास बैंक खाता नहीं है
38% लोग फुटपाथ पर रात गुजारते हैं
94% लोग भिक्षावृत्ति छोड़ना चाहते हैं
70% बच्चे पढ़ाई करना चाहते हैं
बदलाव के संस्थापक/कार्यकारी निदेशक श्री शरद पटेल जी ने बदलाव के द्वारा भिक्षावृत्ति में संलिप्त लोगों के पुनर्वास के लिए संस्था द्वारा विकसित मॉडल ऑफ चेंज एवं अभी तक बदलाव के द्वारा पुनर्वासित किये गये लोगों के प्रभाव को विस्तृत रूप से साझा किया और बताया कि यह रिपोर्ट नीति निर्माण और सामाजिक समावेशन का एक मजबूत आधार बनेगी।
प्रो. तारिक मोहम्मद ने कहा कि स्वीकार्यता और संवेदनशीलता सबसे बड़ी चुनौती है, जो इस रिपोर्ट से संभव हो सकती है। पैनल चर्चा में भिक्षावृत्ति विरोधी कानून में समीक्षा की बात करते हुए प्रोफेसर तारिक जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश भिक्षावृत्ति प्रतिषेध अधिनियम 1975 में परिस्थिति को अपराध बना दिया गया है। जबकि भिक्षावृत्ति में व्यक्ति दर दर ठोकरें खाने के बाद मजबूरी में जाता है। ऐसे लोगों को समाज की मुख्य धारा में लाने के लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय भारत सरकार की स्माइल स्कीम में व्यापक पुनर्वास का प्राविधान किया गया है और भीख मांगने के काम में लगे लोगों के पुनर्वास के लिए उनकी गरिमा को केन्द्र बिन्दु मानते हुए पुनर्वास की प्रक्रिया से गुजारते हुए पुनर्वास की सुविधाएं उपलब्ध कराकर समाज की मुख्य धारा में लाया जा सकता है।
माननीय मंत्री श्री असीम अरुण जी ने कहा कि सभाएं एवं सदन में चर्चाएं बहुत होती हैं लेकिन इस प्रकार के कार्यक्रमों जो कि समाज के वंचित तबके के लोगों स्थिति पर आधारित रिपोर्ट आंकड़े नहीं मिल पाते हैं। उन्होने आगे कहा कि सरकार द्वारा पुनर्वास हेतु संसाधन तो हैं पर उन्हें पुनर्जीवित कर धरातल पर लाने की जरूर है। परिवार आईडी के जरिये उत्तर प्रदेश सरकार यह तय कर रही है कि परिवार में कौन से व्यक्ति को किस योजना का लाभ मिलना चाहिए और अगर नहीं मिल रहा है तो उसे योजना से जोड़ा जाये। अगर किसी परिवार में कोई व्यक्ति 60 साल के ऊपर का है तो उसे वृद्धा पेंशन मिल रही है यदि नहीं तो उसे 1000 की पेंशन दिलायी जाए। उन्होनें सरकारी टूल्स के माध्यम से इस वर्ग की ज़रूरतों की पहचान के प्रयासों को तेज करने की बात कही और संस्थापक शरद पटेल के प्रयासों की सराहना की।
आकांक्षा चंदेल जी ने भीख मांगने के काम में लगे लोगों के पुनर्वास के लिए साइकोथेरेपी के महत्व पर फोकस डालते हुए बताया कि ऐसे लोग तरह तरह के तनावों, उत्पीड़न, अवसाद, चिन्ता तथा नशीले पदार्थों के सेवन से ग्रसित होते हैं। इसके लिए इन वंचित लोगों के लिए होलिस्टिक वेलबीइंग सपोर्ट एप्रोच की बात कही।
श्री रवी गुप्ता (गूँज) संस्था ने कहा कि उपयोगी मेटेरियल को अर्बन से कलेक्ट एवं प्रोसेस करके रूरल डेवलपमेंट हेतु लोगों को सहयोग उनकी गरिमा को ध्यान में रखते हुए किया जाता है तथा जो ग्रास रूट पर बदलाव जैसी संस्थाएं काम करती हैं उनको भी गूँज मटेरियल सपोर्ट करती है ताकि उनकी आर्थिक खर्चे को कम किया जा सके।
प्रोफेसर विवेक कुमार सिंह ने कहा कि भिक्षावृत्ति कोई अपराध नहीं, बल्कि एक सामाजिक चुनौती है, जिसे सहानुभूति और योजनाबद्ध पुनर्वास से सुलझाया जा सकता है।
डॉ अर्चना सिंह जी ने विशेष रूप से महिलाओं की स्थिति पर चर्चा करते हुए कहा कि भिक्षावृत्ति में संलिप्त महिलाओं किशोरियों के मासिक धर्म के समय भोजन और सुरक्षा की भारी कमी है, जिससे वे यौन उत्पीड़न के ख़तरे में रहती हैं।
महेन्द्र प्रताप, सह-संस्थापक बदलाव ने मुख्य अतिथि, विशिष्ठ अतिथि, अतिथियों, प्रतिभागियों, पत्रकारों, स्वैच्छिक संस्थाओं के कार्यकर्ताओं का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कार्यक्रम के समापन की घोषणा की।
