बड़ा फैसला: क्या अब भारत की बारी है? 🇮🇳👇
श्रीलंका से एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका ने अपने सांसदों (MPs) की पेंशन व्यवस्था को पूरी तरह खत्म करने का निर्णय लिया है!
एक तरफ जहाँ आम आदमी रिटायरमेंट के बाद चंद रुपयों की पेंशन के लिए तरस जाता है, वहीं दूसरी तरफ भारत जैसे देशों में सांसदों को महज 5 साल सेवा देने के बाद जीवनभर के लिए भारी-भरकम पेंशन और सुविधाएं मिलने लगती हैं।
सोचने वाली बात यह है:
जब देश का जवान (Agniveer) बिना पेंशन के घर लौट सकता है, जब नई पेंशन स्कीम (NPS) को लेकर आम कर्मचारी परेशान है, तो फिर नेताओं के लिए ‘पुरानी पेंशन’ या ‘विशेष पेंशन’ का दोहरा मापदंड क्यों?
मुख्य बिंदु जिन पर चर्चा जरूरी है:
करदाताओं का पैसा: क्या जनता की गाढ़ी कमाई का इस्तेमाल नेताओं की ऐश-ओ-आराम के लिए होना चाहिए?
समानता का अधिकार: क्या सेवा का मतलब मेवा है या निस्वार्थ देश भक्ति?
आर्थिक सुधार: क्या भारत को भी अपने राजकोषीय घाटे को कम करने के लिए ऐसे कड़े कदम नहीं उठाने चाहिए?
श्रीलंका ने दिखा दिया है कि अगर इच्छाशक्ति हो, तो बदलाव मुमकिन है। अब समय आ गया है कि भारत में भी इस पर एक गंभीर बहस हो। हम वीआईपी कल्चर को खत्म करने की बात तो करते हैं, लेकिन क्या हम इसे धरातल पर लागू करने के लिए तैयार हैं?
आपकी क्या राय है?
क्या भारत में भी सांसदों और विधायकों की पेंशन तुरंत बंद कर देनी चाहिए? अपनी बेबाक राय कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें और इस पोस्ट को इतना शेयर करें कि यह गूँज दिल्ली तक पहुँचे! (PC- CA Rajiv Chandak 9881098027)
