मैक्स अस्पताल, लखनऊ, के डॉक्टरों ने एक्यूट बड–कियारी सिंड्रोम का सफल इलाज किया; उन्नत डीआईपीएस प्रक्रिया से लिवर ट्रांसप्लांट टला

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प्रयागराज, 26 फरवरी 2026: मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, लखनऊ, के डॉक्टरों ने लिवर की नसों में अचानक हुई रुकावट, एक्यूट बड–कियारी सिंड्रोम के एक दुर्लभ और जानलेवा मामले का सफल इलाज किया। उन्नत और बिना बड़ी सर्जरी वाली प्रक्रिया के जरिए 35 वर्षीय मरीज का लिवर ट्रांसप्लांट टाल दिया गया।

प्रयागराज निवासी, सुश्री प्रेमा यादव, को अत्यधिक कमजोरी, तेजी से बढ़ता पीलिया, पेट और पैरों में सूजन तथा लगातार उल्टी की शिकायत के साथ मैक्स अस्पताल, लखनऊ की इमरजेंसी में लाया गया। जांच में एक्यूट बड–कियारी सिंड्रोम की पुष्टि हुई। ह एक गंभीर स्थिति होती है, जिसमें लिवर से खून बाहर ले जाने वाली नसों में अचानक रुकावट या खून का थक्का बन जाता है। इससे लिवर फेल होने का खतरा तेजी से बढ़ सकता है। गंभीर मामलों में अक्सर लिवर ट्रांसप्लांट ही एकमात्र स्थायी इलाज माना जाता है।

हालांकि, तुरंत विभिन्न विशेषज्ञों की सलाह के बाद डॉक्टरों की टीम ने एक उन्नत और बिना बड़ी सर्जरी वाली प्रक्रिया – डायरेक्ट इंट्राहेपेटिक पोर्टोसिस्टमिक शंट (DIPS) करने का निर्णय लिया। इस प्रक्रिया में लिवर के अंदर एक नया रास्ता बनाया जाता है, जिससे खून का प्रवाह फिर से सामान्य हो सके और लिवर पर बढ़ा हुआ दबाव कम हो जाए।

यह प्रक्रिया मैक्स अस्पताल, लखनऊ की इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी और गैस्ट्रोसर्जरी टीम द्वारा की गई। टीम में डॉ. अजय यादव, निदेशक एवं प्रमुख – गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जरी एवं रोबोटिक जीआई सर्जरी; डॉ. शाहबाज़ मोहम्मद खान, एसोसिएट डायरेक्टर – इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी; और डॉ. स्विश कुमार सिंह, सीनियर कंसल्टेंट – इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी का भी सहयोग रहा।

टीम के मिलकर काम करने के महत्व पर जोर देते हुए, डॉ. अजय यादव, ने कहा, इस मामले में लिवर की तेजी से बिगड़ती हालत को समय पर पहचानना और सभी विशेषज्ञों का तुरंत मिलकर काम करना बेहद जरूरी था। मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए, समय पर डीआईपीएस प्रक्रिया करने से उनका लिवर स्थिर हुआ और तुरंत ट्रांसप्लांट की जरूरत नहीं पड़ी। ऐसी अंग-संरक्षण वाली प्रक्रियाएं गंभीर लिवर मामलों में बेहतर परिणाम दे रही हैं।”

केस के बारे में बताते हुए, डॉ. शहबाज़ मोहम्मद ख़ान, ने कहा, “मरीज की स्थिति तेजी से लिवर फेल होने की ओर बढ़ रही थी। उनके शरीर में काफी मात्रा में पानी भर गया था और लिवर की जांच रिपोर्ट भी लगातार खराब हो रही थी। लिवर के अंदर एक नया रास्ता बनाकर हमने दबाव कम किया, खून का प्रवाह सामान्य किया और स्थायी नुकसान होने से बचा लिया।”

डॉ. स्विश कुमार सिंह, ने कहा, “तीव्र बड–कियारी सिंड्रोम दुर्लभ है और इसके लक्षण कई बार अन्य लीवर रोगों जैसे लगते हैं, जिससे पहचान में देरी हो जाती है। समय पर सही जांच और विशेषज्ञ केंद्र में रेफरल जीवन बचा सकता है। यह मामला दर्शाता है कि उन्नत इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी के माध्यम से गंभीर रक्तवाहिनी संबंधी लीवर रोगों का इलाज बिना प्रत्यारोपण भी संभव है।”

मरीज की हालत में तेजी से सुधार हुआ और उन्हें तीन दिन के भीतर स्थिर स्थिति में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई — बिना लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत के।

यह मामला दिखाता है कि जटिल लिवर बीमारियों के इलाज में उन्नत इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी की भूमिका लगातार बढ़ रही है और मैक्स अस्पताल, लखनऊ की अंग बचाने वाली आधुनिक इलाज देने की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है। मैक्स अस्पताल, लखनऊ आने से पहले मरीज इलाज के लिए दूर-दराज के शहरों में भी गई थीं, लेकिन उन्हें सही और सटीक उपचार नहीं मिल पाया था।

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