लखनऊ। राजधानी में अवैध डग्गामार वाहनों का संचालन थमने का नाम नहीं ले रहा है। शहर के विभिन्न इलाकों और चौराहों पर खुलेआम ये वाहन सवारियां ढोते नजर आ रहे हैं, जिससे न केवल यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है बल्कि यात्रियों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ रही है।
विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, कुछ प्रमुख चौराहों पर अवैध रूप से “एंट्री फीस” वसूले जाने की बात सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि यह वसूली नियमित रूप से होती है, जिसके चलते डग्गामार वाहनों के संचालकों को किसी प्रकार का डर नहीं है।
हैरानी की बात यह है कि ट्रैफिक पुलिस की मौजूदगी में ही दर्जनों की संख्या में ये वाहन सड़कों पर फर्राटा भरते दिखाई देते हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर इन अवैध वाहनों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है और किसके संरक्षण में यह खेल चल रहा है।
मुख्यमंत्री द्वारा अवैध गतिविधियों पर सख्ती के तमाम दावे किए गए हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर बयां कर रही है। प्रशासनिक सख्ती के बावजूद डग्गामार वाहनों का संचालन बदस्तूर जारी है।
सूत्रों की मानें तो इस पूरे मामले में कुछ तथाकथित पत्रकारों की भी संलिप्तता बताई जा रही है, जो इस अवैध नेटवर्क को संरक्षण देने में भूमिका निभा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इन अवैध वाहनों की वजह से जाम की समस्या बढ़ती जा रही है और कई बार हादसे भी हो चुके हैं। लोगों ने प्रशासन से इस पर तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग की है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन और ट्रैफिक विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और अवैध डग्गामार वाहनों के खिलाफ क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
