सुनील पाठक, ब्यूरो ,गोरखपुर/ पूर्वांचल,
गोरखपुर, पीपीगंज कस्बे के अंतर्गत ठीक पुलिस चौकी के पीछे बिना लाइसेंस के रेनबो हॉस्पिटल एक बार फिर विवादों में आ गया। बीते मंगलवार को इलाज के दौरान एक 18 महीने की मासूम बच्ची की मौत हो गई। परिजनों ने मौत का कारण डॉक्टर कि लाप्रवाही बताया इसके बाद अस्पताल परिसर में हंगामा जमकर हुआ ।मौके पर पहुंची पुलिस ने हालात को संभाल बच्ची के शव को पोस्टमार्टम के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर भेज दिया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार पनियरा थाना क्षेत्र के मुजुरी निवासी जय विद पासवान अपनी 18 माह की बीमार बच्ची को रेनबो चिल्ड्रन हॉस्पिटल पीपीगंज में इलाज के लिए लेकर पहुंचे थे ।पर दोनों के अनुसार डॉक्टर ने सामान्य इलाज शुरू किया लेकिन बच्चे की हालत लगातार बिगड़ती गई ।जब हालत गंभीर हुई तब डॉक्टर ने रेफर करने की बात कही लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।
इस मामले में परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन रेफर करने में देरी की जिससे बच्चे की जान नहीं बचा सके।
उन्होंने दावा किया कि डॉक्टर ने पैसे के लालच में समय से रेफर नहीं किया।
जानकारी देते चलें कुछ महत्वपूर्ण तत्कालीन सीएमओ आशुतोष दुबे ने रेनबो हॉस्पिटल का निरीक्षण किया था जिसमें रजिस्ट्रेशन संबंधित दस्तावेज मांगने पर अस्पताल प्रशासन टाल मटोल करता रहा। इसके बाद अस्पताल को दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए एक हफ्ते का समय दिया गया था लेकिन अभी तक रजिस्ट्रेशन को लेकर क्या कार्रवाई हुई । अस्पताल प्रबंधन के पास इसकी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है।
पीपीगंज क्षेत्र शहर और ग्रामीण में कई हॉस्पिटल पैथोलॉजी और अल्ट्रासाउंड सेंटर (गन्ना समिति कतरा सहित) विगत कई वर्षों से बिना पंजीकरण के बड़े पैमाने पर से चल रहे हैं ।इन जगहों पर बिना प्रशिक्षण प्राप्त युवक युवतियों इलाज में लगे हैं जो आम जनता के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा साबित हो रहा है और स्वास्थ्य विभाग गहरी निद्रा में सोया हुआ है। स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक भी इस मामले में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाते है।
स्थानीय क्षेत्र सूत्रों के मुताबिक रेनबो हॉस्पिटल में कई मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। लेकिन अक्सर परिजनों को समझ बूझा कर और ले देकर मामले को रफा दफा कर दिया जाता है ।सवाल यह होता है कि ऐसा कब तक चलता रहेगा।
इस घटना के बाद क्षेत्रीय लोगों में भारी आक्रोश है लोगों का कहना है कि जब स्वास्थ्य विभाग को अस्पतालो की अनियमितताओं और लापरवाहियों जानकारी पहले से दी थी तो अब तक इस मामले में कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं होती है।रेनबो हॉस्पिटल में बच्ची की मौत ने एक बार फिर से स्वास्थ्य व्यवस्था पर लापरवाही और प्रशासनिक उदासीनता को उजागर किया है अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है। या मामला जस का तस रहेगा और प्राइवेट हॉस्पिटल वालों का मन ऐसे ही बढ़ता रहेगा।
