युवाओं से सतत लेखन का आव्हान

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सविता स्मृति स्वरोज फाउंडेशन का पांचवां वार्षिक आयोजन

नवयुवा कवियों के काव्य पाठ के साथ पत्रिका व कविता संग्रह का हुआ विमोचन

सुनील चिंचोलकर
बिलासपुर, छत्तीसगढ़। सविता स्मृति स्वरोज फाउंडेशन के पांचवें वार्षिक आयोजन एवं स्मृतिशेष सविता प्रथमेश के जन्मदिन के अवसर पर निसर्ग नीड़, बिलासपुर में शहर के नवयुवा कवियों का काव्य पाठ आयोजित किया गया। साहित्यिक वातावरण में सम्पन्न इस आयोजन में बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी एवं श्रोता उपस्थित रहे।
इसी अवसर पर फाउंडेशन द्वारा प्रकाशित वार्षिक पत्रिका “स्मृति सविता” (2025–26 संयुक्तांक) तथा जानी-मानी कवयित्री पल्लवी मुखर्जी के प्रथम कविता संग्रह “विलुप्ति होती जाती हैं स्त्रियां” का लोकार्पण भी किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथियों में देश के वरिष्ठ कवि, लेखक एवं साहित्यकार तथा श्रीकांत वर्मा सृजन पीठ के अध्यक्ष रामकुमार तिवारी, ईवनिंग टाइम्स के संस्थापक-संपादक एवं प्रगतिशील लेखक संघ के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष नथमल शर्मा, भिलाई की चर्चित कवयित्री मीता दास, विचार मंच गोष्ठी के आयोजक व संचालक तथा जाने-माने उपन्यासकार द्वारिका अग्रवाल (प्रसिद्ध कृतियां – तेरी मेरी कहानी, मध्दम मध्दम, मुसाफ़िर जाएगा कहाँ, कहाँ ले चले हो, बता दो मुसाफ़िर) एवं द्वारिका प्रसाद विप्र शिक्षण समिति के उपाध्यक्ष राजकुमार अग्रवाल मंचासीन रहे।
शहर की युवा पीढ़ी की उल्लेखनीय उपस्थिति—कवि एवं श्रोता दोनों रूपों में—हिंदी साहित्य के उज्ज्वल भविष्य का संकेत मानी गई। नवयुवा कवियों अनुराग तिवारी, प्रकाश साहू, मीरा मृदु, निधि तिवारी, वर्षा रानी, राहुल सोनी, शिवी रावत, उपासना, शुभांगी बाजपेयी, युवराज सोनी, अंजू कमलेश, जानकी राजपूत, प्रीति तिवारी, साकेत तिवारी, आदित्य एवं निहाल सोनी ने अपनी-अपनी रचनाओं का पाठ किया। वीर रस, श्रृंगार, प्रेम और समकालीन संवेदनाओं से परिपूर्ण कविताओं को श्रोताओं की भरपूर तालियां और प्रशंसा मिली।
मुख्य अतिथि साहित्यकारों ने अपने उद्बोधनों में युवा कवियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें सतत लेखन और वैचारिक प्रतिबद्धता के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में फाउंडेशन के निदेशक प्रथमेश सविता ने संस्था की स्थापना के उद्देश्य एवं अब तक किए गए कार्यों की जानकारी दी।
कवयित्री पल्लवी मुखर्जी ने अपने कविता संग्रह के विमोचन पर मंच और फाउंडेशन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए अपने साहित्यिक परिवार—पिता शितेन्द्रनाथ, माता शुक्ला एवं भाई भास्कर चौधरी—को स्मरण किया तथा संग्रह से चयनित कविताओं का पाठ भी किया।
कार्यक्रम का संचालन आकांक्षा बाजपेयी ने किया। अतिथियों का स्वागत पुष्पों के पौधों से किया गया। आभार प्रदर्शन महिमा दुबे द्वारा किया गया। अंत में सभी उपस्थितजनों ने फाउंडेशन की प्रेरणास्रोत स्मृतिशेष सविता प्रथमेश को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

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