9 साल की बच्ची को अध्यापिका ने डस्टर से पीटा, स्वास्थ्य बिगड़ा; अभिभावकों में स्कूल प्रबंधन के खिलाफ गुस्सा

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स्थानीय निजी विद्यालय The Educational Academy में नौ साल की छात्रा के साथ हुई कथित मारपीट का मामला सामने आया है। परिवार का आरोप है कि क्लास टीचर ने बच्ची को केवल इसलिए हाथों पर डस्टर से मारा क्योंकि वह एक दिन पहले स्कूल नहीं आई थी और उसे यह जानकारी नहीं थी कि किस अध्याय का याद-करना गृहकार्य दिया गया था। मारपीट के बाद बच्ची की तबीयत काफी बिगड़ गई और उसे डॉक्टर के पास ले जाना पड़ा। घटना के बाद अभिभावकों में भारी आक्रोश है और स्कूल प्रबंधन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

क्या हुआ था 26 तारीख को?

पीड़ित बच्ची, देवांशि चौधरी (उम्र 9 वर्ष), 25 तारीख को स्कूल नहीं गई थी। परिवार के अनुसार, अगले दिन जब वह 26 तारीख को स्कूल पहुँची, तो क्लास टीचर ने उससे एक अध्याय सुनाने को कहा। बच्ची ने बताया कि उसे किसी भी अध्याय के याद-करने का गृहकार्य दिए जाने की जानकारी नहीं थी। इसी बात पर अध्यापिका ने नाराज होकर उसे डस्टर से हाथों पर कई बार मारा।

परिवार का कहना है कि छोटी बच्ची शारीरिक रूप से इतना दर्द सहन नहीं कर पाई, जिसके चलते छुट्टी के समय घर पहुँचते-पहुँचते उसकी हालत बिगड़ने लगी। घर आने के बाद उसका हाथ सूज गया, वह रोती रही और शाम तक उसे बुखार भी आ गया। इसके बाद परिवार ने उसे तुरंत डॉक्टर को दिखाया जहाँ उसे आराम और निगरानी की सलाह दी गई।

देवांशि की मेडिकल स्थिति अभी भी पूरी तरह ठीक नहीं है, और परिजन लगातार उसका इलाज करवा रहे हैं।

परिजनों ने स्कूल प्रबंधन पर लगाए गंभीर आरोप

परिवार का आरोप है कि The Educational Academy में शिक्षण व्यवस्था बेहद अव्यवस्थित है। उनका कहना है कि स्कूल में पढ़ाई की गुणवत्ता अत्यंत कमजोर है और शिक्षक चयन में कोई सख्ती दिखाई नहीं देती।

परिजनों के अनुसार:

कक्षाओं में शिक्षकों द्वारा खुद पढ़ाने की बजाय स्मार्ट क्लास के नाम पर YouTube के वीडियो चलाए जाते हैं।

स्कूल में पुस्तकों का कोई तय समय-सारणी (टाइमटेबल) नहीं है।

बच्चों से रोज सभी किताबें ले जाने को कहा जाता है, जिससे उनका बैग जरूरत से ज्यादा भारी हो जाता है और छोटे बच्चे चल भी नहीं पाते।

पढ़ाई में स्पष्टता नहीं, समझाने के बजाय रटवाने पर जोर दिया जाता है।

परीक्षा या टेस्ट के नाम पर ₹600 तक की वसूली होती है, लेकिन पढ़ाई उसके अनुरूप नहीं होती।

परिवार का कहना है कि कई बार उन्होंने स्कूल प्रबंधन को पुस्तकों का टाइमटेबल तय करने, अध्यापन प्रणाली सुधारने और बच्चों को अनावश्यक बोझ से मुक्त करने की सलाह दी, लेकिन स्कूल की ओर से कभी कोई सुधार नहीं किया गया।

“पैसा लेने में तेज, शिक्षा देने में कमजोर” – अभिभावकों का आरोप

देवांशि के परिवार का कहना है कि स्कूल फीस और अन्य शुल्क के मामले में बेहद सख्त रवैया अपनाता है, लेकिन शिक्षा स्तर बच्चों के भविष्य के अनुकूल नहीं है। शिक्षकों द्वारा बच्चों पर अत्यधिक दबाव डालना और छोटी-छोटी बातों पर कठोर दंड देना आम हो गया है।

परिजन बताते हैं कि इतने कम उम्र के बच्चे से अध्याय याद न होने पर डस्टर से पीटना किसी भी तरह से स्वीकार्य नहीं है। यह न सिर्फ मानसिक उत्पीड़न है, बल्कि शारीरिक प्रताड़ना के तहत गंभीर अपराध भी माना जाता है।

अभिभावकों में नाराजगी, कार्रवाई की मांग

घटना के प्रकाश में आने के बाद क्षेत्र के अन्य अभिभावक भी नाराज हैं और स्कूल प्रशासन से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। कई अभिभावक यह पूछ रहे हैं कि

बिना उचित अध्यापन के बच्चों को कैसे याद-करने का बोझ दिया जा सकता है?

एक अध्यापक को किस अधिकार से बच्चे पर डस्टर से वार करने का अधिकार मिल जाता है?

यदि स्कूल में पढ़ाई ठीक प्रकार नहीं हो रही, तो परीक्षा शुल्क किस आधार पर लिया जा रहा है?

शिक्षक प्रशिक्षण और बच्चों की सुरक्षा की क्या व्यवस्था है?

अभिभावक समूह जल्द ही शिक्षा विभाग में औपचारिक शिकायत करने की तैयारी में हैं।

कानूनी स्थिति क्या कहती है?

बच्चों पर किसी भी प्रकार की शारीरिक दंड देना Right to Education Act 2009 के तहत प्रतिबंधित है। भारत में किसी भी स्कूल में बच्चे को डंडा, स्केल या डस्टर से मारना अपराध की श्रेणी में आता है। यह न सिर्फ स्कूल के खिलाफ कार्रवाई का आधार बनता है, बल्कि संबंधित शिक्षक पर भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

स्कूल की छवि पर बड़ा सवाल

The Educational Academy पहले भी अपने शिक्षण स्तर और अनुशासन संबंधी मुद्दों को लेकर चर्चा में रहा है। अभिभावक लगातार शिकायत करते रहे हैं कि स्कूल आधुनिक सुविधाओं का दिखावा तो करता है, लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता बेहद कमजोर है।

इस मामले ने एक बार फिर स्कूल की व्यवस्थाओं पर पर्दे के पीछे चल रहे अव्यवस्था को उजागर कर दिया है। एक 9 साल की बच्ची का मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दांव पर लगने के बाद अब स्कूल प्रबंधन की जवाबदेही तय होना बेहद जरूरी माना जा रहा है।

परिवार की मांग

देवांशि के परिवार ने स्कूल प्रबंधन से मांग की है:

  1. संबंधित अध्यापिका के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की जाए।
  2. स्कूल लिखित रूप से माफी मांगे और इस घटना की निष्पक्ष जांच करवाए।
  3. बच्चों पर किसी भी तरह की मारपीट या कठोर दंड की मनाही सुनिश्चित की जाए।
  4. पढ़ाई की गुणवत्ता बढ़ाई जाए और बिना मतलब रटवाने वाली प्रणाली खत्म की जाए।
  5. बैग हल्का करने के लिए पुस्तकों का टाइमटेबल अनिवार्य रूप से लागू किया जाए।

समाप्ति

देवांशि की तबीयत अभी भी सुधार पर है, लेकिन मानसिक आघात को देखते हुए उसके परिवार की चिंता बढ़ी हुई है। यह मामला केवल एक बच्चे की सुरक्षा से नहीं जुड़ा, बल्कि पूरे शिक्षा-तंत्र की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है। यदि स्कूल बच्चों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और पढ़ाई की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं देंगे, तो ऐसी घटनाएँ भविष्य के लिए खतरनाक संकेत साबित होंगी।

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