माननीय हाईकोर्ट के फैसले के विपरीत बिना क्षेत्राधिकार डीएफओ ने जारी किया बेदखली आदेश
कतर्नियाघाट वन्य जीव विहार के मुर्तिहा रेंज में स्थित हिंदू मुस्लिम एकता का प्रतीक अति प्राचीन दरगाह हजरत मोहम्मद सैयद हाशिम अली शाह उर्फ लक्कड़ शाह रहमतुल्लाह अलैह वक्फ नंबर 108 जिसके प्राचीन होने एवं अस्तित्व का प्रमाण महत्वपूर्ण दस्तावेज ब्रिटिश गजट सन 1903 से भी साबित होता है उक्त अति प्राचीन दरगाह को प्रभागीय वनाधिकारी कतर्नियाघाट बी शिवशंकर ने अतिक्रमण घोषित करते हुए नोटिस जारी करने की कार्यवाही की थी जिसपर दरगाह कमेटी के सेक्रेट्री इसरार अहमद इदरीसी द्वारा माननीय उच्च न्यायालय लखनऊ की खंडपीठ में याचिका संख्या WRIC 4607/2025 योजित की थी जिसकी सुनवाई करते हुए माननीय उच्च न्यायालय लखनऊ की माननीय न्यायमूर्ति श्री राजन रॉय और माननीय न्यायमूर्ति श्री ओम प्रकाश शुक्ला की डबल बेंच ने प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए डीएफओ कतर्नियाघाट बी शिवशंकर द्वारा जारी नोटिस पर आगे कार्यवाही जारी रखने पर रोक लगाते हुए याचिकार्ता की आपत्ति का निस्तारण किए बिना कोई भी अग्रिम कार्यवाही नहीं किए जाने का आदेश पारित किया था। उक्त आदेश के विपरीत डीएफओ बी शिवशंकर ने दिनांक 5 जून 2025 को बेदखली का आदेश जारी कर दिया तथा उक्त आदेश की प्रति आज दिनांक 08 जून को दरगाह कमेटी को रिसीव कराया गया है। जबकि माननीय उच्च न्यायालय द्वारा यह आदेश पारित किया गया था कि कमेटी द्वारा दाखिल आपत्ति का संज्ञान लेकर ही कोई आदेश पारित किया जाएगा लेकिन उक्त बेदखली आदेश में कमेटी की कई महत्वपूर्ण आपत्तियों को संज्ञान में लिए बिना अंतिम आदेश पारित किया गया है जोकि गैरकानूनी है तथा आदेश के खिलाफ अपील के संबंध में कानून में निर्धारित समयावधि का भी कोई उल्लेख नहीं किया गया है जबकि प्राकृतिक न्याय का स्थापित सिद्धांत यह कहता है कि किसी भी आदेश की विरुद्ध अपील आदि के लिए उचित समय जोकि कम से कम दस कार्य दिवस का हो दिया जाना चाहिए लेकिन डीएफओ कतर्नियाघाट द्वारा मनमाने ढंग से पारित आदेश में अपील के लिए किसी समय का कोई भी उल्लेख नहीं किया गया है।
प्रबंध समिति दरगाह शरीफ लक्कड़ शाह द्वारा उक्त आदेश के खिलाफ पुनः माननीय उच्च न्यायालय लखनऊ का रुख किया जाएगा जिसके लिए “अवकाश बेंच” में त्वरित सुनवाई के संबंध में प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
वक़्फ़ अधिनियम संशोधन के संबंध में माननीय उच्चतम न्यायालय में भी लंबित है याचिका जिसपर भारत सरकार द्वारा माननीय उच्चतम न्यायालय को अवगत कराते हुए बताया है कि सरकार किसी भी पंजीकृत वक्फ का प्रकार नहीं बदलेगी ना ही उसकी अधिसूचना को रद्द किया जाएगा।
दरगाह कमेटी के सदर रईस अहमद ने बताया कि कमेटी के सेक्रेट्री इसरार अहमद इदरीसी द्वारा लखनऊ बेंच में दायर की गई याचिका पर दरगाह कमेटी के अधिवक्ता सैयद अकरम आजाद, सैय्यद फारूक अहमद एवं विनोद यादव ने डीएफओ कतर्नियाघाट के सुनवाई करने के क्षेत्राधिकार को चुनौती देते हुए दरगाह कमेटी का पक्ष रखा था तथा डीएफओ कतर्नियाघाट की कार्रवाई को वक्फ अधिनियम का उल्लंघन एवं वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 पर हालिया सुनवाई के दौरान पर दिये गये निर्देशों के क्रम में सुप्रीम कोर्ट की अवमानना तथा विधि विरुद्ध एवं कानून सम्मत न होने का हवाला दिया था।
इस अवसर पर दरगाह कमेटी के सदर रईस अहमद की अध्यक्षता में एक आपात बैठक हुई जिसमें डीएफओ द्वारा जारी किए गए बेदखली आदेश को माननीय उच्च न्यायालय लखनऊ में चुनौती दिए जाने पर सर्वसम्मति से फैसला लिया गया इस अवसर पर सेक्रेट्री इसरार अहमद इदरीसी, नायब सदर जकी अहमद, शमशेर बहादुर राना कोषाध्यक्ष सद्दाम हुसैन सदस्य हाजी लियाकत खां, अनवारुल हसन, शब्बीर अली, चुन्ना, राहत हुसैन समेत सभी पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे |
