पी.वी.आनंदपद्मनाभन
जलगांव।
महाराष्ट्र के जलगांव में शनिवार को प्रारंभ हुई विश्व हिंदू परिषद की केंद्रीय प्रबंध समिति की दो दिवसीय बैठक आज मंदिरों की सरकारी नियंत्रण से मुक्ति तथा हिंदू समाज को विखंडित करने वाली शक्तियों के विरुद्ध एकजुटता के संकल्प के साथ पूरी हो गई।
बैठक में हुए निर्णयों की जानकारी देते हुए विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष व वरिष्ठ अधिवक्ता श्री आलोक कुमार ने कहा कि हिंदू समाज का संकल्प है कि अब मंदिर सरकारी कब्जे में नहीं रहेंगे। समाज अब उन्हें मुक्त कराके ही रहेगा।
हिंदू एकता पर प्रहारों का देंगे करारा जवाब
इसके साथ ही बैठक में जाति, भाषा, प्रांत, क्षेत्र व लिंग इत्यादि के आधार पर हिंदू समाज के विविध घटकों को अलग-अलग करने की विभाजनकारी मानसिकता के विरुद्ध एक प्रस्ताव भी पारित किया गया जिसमें सभी कार्यकर्ताओं, पूज्य संतों व सामाजिक संगठनों के साथ संपूर्ण हिंदू समाज से आह्वान किया गया कि वह समाज को तोड़ने वाली इन शक्तियों को पहचान कर अपने अंतर्निहित भेदभावों को दूर कर, संगठित रहें तो हमें ना कोई तोड़ सकेगा और ना ही मिटा सकेगा।
विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष ने यह भी कहा कि कभी पीडीए तो कभी मीम – भीम, कभी आर्य-द्रविड़ तो कभी महिषासुर-दुर्गा, कभी भाषा-जाति तो कभी राज्य व क्षेत्रवाद, तो कभी ओआरपी जैसे मुद्दों के माध्यम से कुछ हिंदू द्रोही शक्तियां हिंदू समाज की एक जुटता को तोड़ने में लगी हैं। हमने 1969 में ही संकल्प लिया था कि ‘हिन्दवा: सोदरा सर्वे, ना हिंदू पतित भवेत्’ अर्थात् हिंदू हम सब भाई हैं। कोई ऊंचा नीचा नहीं है। हम हिंदू द्रोहियों के विभाजनकारी षड्यंत्रों को फलीभूत नहीं होने देंगे।
इस सम्बन्ध में, विहिप की इस केंद्रीय प्रबंध समिति बैठक में, ‘संगठित एवं सशक्त हिंदू ही समाज विखंडन के षड्यंत्रों का एकमेव समाधान’ नाम से
पारित एक प्रस्ताव में कहा गया है कि ‘इन विघटनकारी प्रवृत्तियों के पीछे विस्तारवादी चर्च, कट्टरपंथी इस्लाम, मार्क्सवाद, धर्मनिरपेक्षतावादी तथा बाजारवादी शक्तियां तीव्रगति से सक्रिय हैं। इसके लिए विदेशी वित्त पोषित, तथाकथित प्रगतिशीलतावादी, धर्मांतरणकारी शक्तियां और भारत विरोधी वैश्विक समूह भी सक्रिय हैं। इनका अंतिम लक्ष्य हिंदू समाज को तोड़ना और भारत की जड़ों पर प्रहार करना है।’ प्रस्ताव में हिंदू समाज से आह्वान करते हुए कहा गया है कि वो ‘विखंडनकारी शक्तियों को पहचान कर अपने अंतर्निहित भेदभावों को जड़मूल से समाप्त करें।’ इसमें सरकारों से भी ‘नैतिक शिक्षा को पाठ्यक्रम में समाविष्ट’ करने का आह्वान किया गया है।
मंदिर स्वाधीनता आंदोलन:
श्री आलोक कुमार ने कहा कि बैठक में मंदिरों की सरकारी नियंत्रण से मुक्ति हेतु एक व्यापक कार्य योजना भी बनाई गई है। इसके अंतर्गत हिंदू समाज के प्रतिनिधि आगामी 7 से 21 सितंबर के बीच राज्यों के मुख्यमंत्रियों से मिलकर इस संबंध में ज्ञापन देंगे। प्रत्येक महानगर में प्रबुद्ध जनों की सभा करके इसके प्रति समर्थन बढ़ाया जाएगा। दूसरे चरण में, देश की सभी बड़ी विधानसभाओं के सत्र के दौरान विधायकों से व्यापक संपर्क करेंगे जिससे वे अपनी राज्य सरकारों पर इस हेतु उचित दबाव बना कर, मंदिरों को स्वाधीन करा सकें।
महाराष्ट्र के जलगांव स्थित बलाणी रिसॉर्ट में संपन्न हुई इस द्विदिवसीय बैठक में विहिप के केंद्रीय महा मंत्री बजरंग लाल बागड़ा ने संगठन की छमाही प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत कर पिछली बैठक की कार्यवाही का अनुमोदन भी सदन से कराया। इसमें विहिप के संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे, सह संगठन महामंत्री विनायकराव देश पांडे, वरिष्ठ उपाध्यक्ष व श्री राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र के महा सचिव चंपतराय, कोषाध्यक्ष रमेश गुप्ता के अतिरिक्त बजरंगदल, दुर्गावाहिनी, मातृ शक्ति, गौरक्षा, सेवा, समरसता, सत्संग, धर्मप्रसार, मठ मंदिर जैसे आयामों के राष्ट्रीय व क्षेत्रीय प्रमुख भी उपस्थित थे।
इसमें देश भर के सभी प्रांतों के 265 विहिप पदाधिकारियों तथा नेपाल से पधारे संगठन के प्रतिनिधियों ने भाग लि
संगठित एवं सशक्त हिन्दू ही समाज विखण्डन के षड्यन्त्रों का एकमेव समाधान
हिन्दू समाज मानव कल्याण के ईश्वर प्रदत्त पुनीत कार्य में सतत् कार्यरत रहा है । अनेक आसुरी शक्तियाँ इसको विखण्डित करती रही हैं । वर्तमान में इनकी गति और अधिक तीव्र हो गई है । जाति, भाषा, प्रान्त, क्षेत्र, लिंग, पूजा-पद्धति, परम्परा, रीति-नीति तथा आचार-विचार के नाम पर हमारी सामाजिक एकता को विविध प्रकार से तोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं । हिन्दू को हिन्दू के ही विरुद्ध खड़ा किया जा रहा है । जातीय दुराग्रह के आधार पर समाज को विभाजित करने तथा भारत उद्भूत धार्मिक एवं पांथिक व्यवस्थाओं में परस्पर अविश्वास निर्माण करने के षड़यन्त्र एवं धर्मांतरण का सुनियोजित कुचक्र, हिन्दू प्रतीकों, पूज्य संतों, परम्पराओं एवं त्यौहारों के प्रति अश्रद्धा निर्माण करना, हिन्दू पहचान को मिटाने के प्रयास तथा हिन्दू युवा और महिला शक्ति के मन में अपनी ही परम्परा के प्रति आत्महीनता उत्पन्न कर उन्हें उनके मूल से काटना ही इनका उद्देश्य है । इन विघटनकारी प्रवृत्तियों के पीछे विस्तारवादी चर्च, कट्टरपंथी इस्लाम, मार्क्सवाद, धर्मनिरपेक्षतावादी तथा बाजारवादी शक्तियां तीव्रगति से सक्रिय हैं । इसके लिए विदेशी वित्त पोषित, तथाकथित प्रगतिशीलतावादी, धर्मांतरणकारी शक्तियां और भारत विरोधी वैश्विक समूह भी सक्रिय हैं । इनका अन्तिम लक्ष्य हिन्दू समाज को तोड़ना और भारत की जड़ों पर प्रहार करना है ।
विश्व हिन्दू परिषद की प्रबंध समिति का यह मत है कि इन षड़यन्त्रों के बावजूद भी हिन्दू जागरण प्रारम्भ हो चुका है । विधर्मियों की अनवरत कुचेष्टाओं का उत्तर देते हुए देश के कोने-कोने से हिन्दू समाज पुनः अपने धर्म, परम्परा, संस्कृति और मूल की ओर लौट रहा है । महाकुंभ, कांवड़यात्राएं, श्रीअमरनाथ यात्रा, श्रीरामजन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण के सभी चरणों में समाज की सहभागिता, गौरक्षा आन्दोलनों, विभिन्न धार्मिक आयोजनों, तीर्थों तथा मन्दिरों में हिन्दू समाज के विराट स्वरूप का प्रकटीकरण हो रहा है । राष्ट्रीय एवं हिन्दू जीवन मूल्यों से जुड़े साहित्य, कला, संगीत आदि के प्रति बढ़ता हुआ आकर्षण, हिन्दू नायकों के प्रति बढ़ती श्रद्धा एवं आक्रान्ताओं के प्रति बढ़ता आक्रोश ये सब हिन्दू जागरण के ही प्रकट लक्षण हैं ।
विश्व हिन्दू परिषद सभी कार्यकर्ताओं, पूज्य संतों, सामाजिक, धार्मिक संगठनों, मातृशक्ति तथा समस्त हिन्दू समाज का आह्वान करती है कि वे विखण्डनवादी शक्तियों को पहचानें । अपने अन्तर्निहित भेदभावों को जड़मूल से समाप्त करें । सरकारें नैतिक शिक्षा को पाठ्यक्रम में समाविष्ट करें । प्रत्येक हिन्दू जाग्रत एवं संगठित होकर समाजविरोधी शक्तियों का प्रभावी प्रतिकार करे, तभी हमें न कोई तोड़ सकेगा और न ही मिटा सकेगा।
