जालौन/बुंदेलखंड:
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आवारा पशुओं के संरक्षण और संरक्षण स्थलों में हरा चारा, भूसा व पानी उपलब्ध कराने के दावे धरातल पर दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। ताजा मामला जालौन जिले के आटा गांव का है, जहां सरकारी गौशाला भ्रष्टाचार और बदहाली का शिकार हो चुकी है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार द्वारा मवेशियों के भरण-पोषण के लिए आने वाले लाखों रुपये के बजट का ग्राम प्रधान प्रतिनिधि, सचिव और स्थानीय साठगांठ से गबन किया जा रहा है।
भूख-प्यास से मर रहे जानवर, मिट्टी खोदी तो निकलेंगे सैकड़ों कंकाल
गौशाला में जानवरों के लिए न तो खाने को सूखा-हरा चारा है और न ही पीने का पानी। भूख और प्यास से बेहाल होकर दर्जनों मवेशी दम तोड़ चुके हैं। ग्रामीणों ने सनसनीखेज दावा किया है कि मृत जानवरों को बाहर ले जाने के बजाय जेसीबी से गौशाला परिसर में ही गड्ढा खोदकर दबा दिया जाता है। यदि वहां की मिट्टी हटाकर निष्पक्ष जांच की जाए, तो सैकड़ों जानवरों के कंकाल बरामद होंगे।
जनसमस्याओं और गौशाला घोटाले को लेकर जिलाधिकारी से शिकायत
गांव में ठप पड़े विकास कार्यों, पानी, सड़क, नाली और तालाबों की दुर्दशा के साथ-साथ गौशाला में हो रही धांधली को लेकर आटा गांव के निवासियों ने एकजुट होकर जिलाधिकारी को एक शिकायती पत्र सौंपा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि विकास कार्यों और गौशाला के नाम पर आने वाले सरकारी धन की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा दोषी प्रधान, लेखपाल और सचिवों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
शिकायत से बौखलाए प्रधान प्रतिनिधि, पीड़ित दंपति को दी धमकी
जिलाधिकारी तक शिकायत पहुंचने की खबर मिलते ही ग्राम प्रधान प्रतिनिधि रविंद्र सिंह बौखला गए। आरोप है कि उन्होंने शिकायतकर्�
गौशाला बनी मवेशियों की कब्रगाह: बुंदेलखंड के आटा गांव में लाखों का गबन, शिकायत पर ग्रामीणों को मिल रही धमकियां
