थाना नवाबगंज पुलिस की शह पर न्यायालय के स्थगन आदेश की उड़ रही धज्जियां, पीड़ित लगा रहा न्याय की गुहार

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थाना नवाबगंज पुलिस की शह पर न्यायालय के स्थगन आदेश की उड़ रही धज्जियां, पीड़ित लगा रहा न्याय की गुहार
प्रतापगढ़ (नवाबगंज)। स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। नवाबगंज थाना क्षेत्र में माननीय न्यायालय द्वारा जारी स्थगन आदेश (स्टे ऑर्डर) को ताक पर रखकर विपक्षी दल द्वारा धड़ल्ले से निर्माण कार्य कराया जा रहा है, और आरोप है कि इस पूरे मामले में इलाकाई पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है।
पुलिस संरक्षण में हो रहा अवैध निर्माण, पीड़ित को मिल रही धमकी
पीड़ित हरकेश यादव ने बताया कि जिस जमीन पर न्यायालय का स्थगन आदेश प्रभावी है, वहां पुलिस के कथित संरक्षण में अवैध रूप से निर्माण कार्य जारी है। जब पीड़ित ने इस अवैध निर्माण का विरोध किया, तो विपक्षी दल की ओर से उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। आरोप है कि पीड़ित को डराने और चुप कराने के उद्देश्य से हरिजन महिलाओं के माध्यम से झूठे मुकदमे (एससी/एसटी एक्ट) में फंसाने की खुली धमकी दी जा रही है।
उच्चाधिकारियों को शिकायत के बाद भी कार्रवाई शून्य
पीड़ित हरकेश यादव न्याय के लिए लगातार भटकने को विवश है। पीड़ित ने बताया कि वह इस पूरे मामले से नवाबगंज थाना प्रभारी सहित जिले के तमाम उच्चाधिकारियों को कई बार लिखित और मौखिक रूप से अवगत करा चुका है। लेकिन इसके बावजूद धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
किसी बड़ी घटना के इंतजार में बैठी नवाबगंज पुलिस!
स्थानीय ग्रामीणों और पीड़ित का कहना है कि नवाबगंज थाना प्रभारी मामले की संवेदनशीलता को समझने के बजाय किसी बड़ी अप्रिय घटना या खूनी संघर्ष का इंतजार कर रहे हैं। राजनैतिक संरक्षण और पुलिस की उदासीनता के कारण विपक्षी दल के हौसले बुलंद हैं, वहीं कानून पर भरोसा रखने वाला पीड़ित न्याय की आस में दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है।
अब देखना यह होगा कि इस मामले में जिले के आला अधिकारी दखल देते हैं या फिर नवाबगंज पुलिस की यह लापरवाही किसी बड़ी वारदात का कारण बनती है।
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प्रतापगढ़ मानिकपुर से राकेश कुमार धुरिया की रिपोर्ट

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