सेवा और संवेदना की मिसाल बनीं रेखा आहूजा, दो बुजुर्गों की आंखों में लौटाई रोशनी

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सुवानी शांति धाम सुखाश्रम के प्रभुजनों का सफल मोतियाबिंद ऑपरेशन, समाज सेवा के लिए मिला सम्मान और प्रेरणा

सुनील चिंचोलकर
बिलासपुर, छत्तीसगढ़। समाज सेवा केवल सहायता का माध्यम नहीं, बल्कि मानवता के प्रति समर्पण का सर्वोच्च उदाहरण है। इसी भावना को साकार कर रही हैं शहर की समाजसेवी रेखा आहूजा, जिनके अथक प्रयास और संवेदनशील सहयोग से सुवानी शांति धाम सुखाश्रम के दो प्रभुजनों का सफल मोतियाबिंद ऑपरेशन संपन्न हुआ। वर्षों बाद दोनों बुजुर्गों की आंखों की रोशनी लौटने से उनके जीवन में नई आशा और खुशियों का संचार हुआ।
रेखा आहूजा लंबे समय से जरूरतमंदों की सेवा के लिए समर्पित हैं। अपनी व्यावसायिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ वे सामाजिक सरोकारों में भी निरंतर सक्रिय रहती हैं। उनका मानना है कि किसी जरूरतमंद के चेहरे पर मुस्कान लाना ही सबसे बड़ी उपलब्धि है। उनके सेवा कार्यों से अनेक लोग प्रेरित होकर समाजहित के कार्यों में जुड़ रहे हैं।
इस सेवा अभियान में सतराम जेठमलानी, राजेश खरे, सरिता सिंह, सिमरन, रूपल, भावना, रीटा, रजनी एवं श्याम तिवारी सहित अन्य सहयोगियों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। सभी ने रेखा आहूजा के नेतृत्व, संवेदनशीलता और सेवाभाव की सराहना करते हुए उनके साथ समाज सेवा के कार्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया।
इस अवसर पर श्याम तिवारी ने कहा कि रेखा आहूजा का स्नेह, विश्वास और सेवा का जज्बा सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि उन्हें सदैव स्वस्थ, ऊर्जावान और समाज सेवा के लिए समर्पित रखें, ताकि उनके द्वारा देखे गए सेवा के सपनों को पूरी निष्ठा के साथ साकार किया जा सके।
रेखा आहूजा का यह मानवीय प्रयास समाज में करुणा, सेवा और संवेदना का प्रेरक संदेश देता है तथा यह विश्वास मजबूत करता है कि निस्वार्थ सेवा से किसी के जीवन में नई रोशनी लाई जा सकती है।

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