हाजी नसीम नहीं रहे
जिस कब्रिस्तान की देखभाल की ज़िम्मेदारी संभाल रहे थे, उसी में सुपुर्दे खाक़ किए गए
संवाददाता
बहेड़ी।इंसान का आखिरी घर कब्रिस्तान में ही है. कब्रिस्तान की साफ-सफाई, उसमें रौशनी-पानी और मिट्टी डालने जैसे तमाम इन्तिज़ामों में लगे रहने वाले शख्स को भी एक रोज़ उसी में जगह मिलना है.हाजी नसीम का शुमार यहाँ ऐसे ही लोगों में था, जिन्होंने कब्रिस्तान की देखरेख में काफ़ी अहम रोल निभाया,और रात उसी कब्रिस्तान में हमेशा-हमेशा के लिए पहुँच गए.
हाजी नसीम, बहेड़ी के मशहूर बेकरी व्यापारी और नगर पालिका के सभासद सलीम चंदा के वालिद थे. पिछले काफ़ी दिनों से वह बीमार चल रहे थे, और अस्पताल में इलाज चल रहा था.कल सुबह उन्होंने आखिरी सांस ली, और दुनिया-ए-फ़ानी को अलविदा कह दिया.
हाजी नसीम अहमद की कस्बे के अच्छे व्यापारियों में गिनती होती थी. उनका बेकरी का कारोबार है. रमज़ान के महीने में रोज़दारों की सहरी के लिए बनाई गई उनकी ब्रेड काफ़ी मशहूर है.हाजी नसीम सामाजिक सरोकार से जुड़े मुद्दों में काफ़ी एक्टिव रहते थे. कब्रिस्तान के रखरखाव में उन्होंने काफ़ी काम किया. बड़ी तादाद में लोग उनके जनाज़े में शामिल हुए.
