महाराजगंज, 11 नवंबर, फरेंदा मल्टीपरपज सेट स्टोर पर गेहूं वितरण

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महाराजगंज, 11 नवंबर, फरेंदा मल्टीपरपज सेट स्टोर पर गेहूं वितरण चल रहा था इसी बीच क्षेत्र का एक किसान (चौधरी) अपने नंबर का इंतजार कर रहा था और इंतजार करते-करते काफी समय गुजर गया। लगभग 2:30 बजे जब सेंटर इंचार्ज से इस बारे में जानकारी प्राप्त करना चाहा। अभी किसान सेंटर इंचार्ज से बारे में अपने नंबर के संबंध में बातचीत कर रहा था तो हमारा नंबर कब आएगा तो सेंटर सेंटर इंचार्ज ने कहा कि कल आना तब मिलेगा उसने कहा सुबह से इंतजार कर रहे हैं और हमारे नंबर के अलावा दूसरे को आप दे रहे हैं इतने में ही सेंटर इंचार्ज के सहायक ने गरीब और बुजुर्ग किस से गर्म मिजाज में बात की। किसान भी कम नहीं था गरम मिजाज का जवाब गर्म मिजाज में ही दिया ।इस पर बात बढ़ गई और ऊंची आवाज में सेंटर इंचार्ज सहायक और उपरोक्त किसान में वार्ता होने लगी ।वार्ता बढ़ते देख मामला जब गर्म होने लगा किस को बाहर जाने के लिए कहा गया तो अन्य मौजूद किसानों ने बीच बचाव करके मामले को शांत कराया। मामला उग्र होते देख सेंटर इंचार्ज ने चौधरी नामक किसान को बैठाया और कुछ देर बाद उसको गेहूं का बीज दिया यह सब वाक्य पत्रकार के सामने ही हुआ। जब सेंटर इंचार्ज का यह हाल है कि किसान का सम्मान नहीं कर सकते और किसानों के बदौलत उनको रोटी मिलती है इस घटना के पहले संवाददाता ने जब कुछ किसानों से गेहूं के रेट के बारे में जानकारी प्राप्त करनी चाहिए तो उपस्थित लोगों ने बताया किसान मजबूर और लाचार होता है उसे सिर्फ और अपनी सिर्फ खेती दिखाई देती है 100, 50 अगर अधिक लेते हैं तो हम लोगों को देना पड़ता है ताकि समय बर्बाद ना हो किसानों ने बताया सब विभागीय मिली भगत है और उच्च अधिकारी भी इन सब मामलों में संज्ञान नहीं लेते हैं क्योंकि उनका हिस्सा उन तक पहुंच जाता है उपस्थित लोगों ने यह भी बताया की स्थानीय जनप्रतिनिधियों के यहां 10-20 खाद बीज के बोरे पहुंच जाते हैं उनसे कोई नहीं पूछने वाला होता है।यह सेंटर इंचार्ज भूल गए ।सरकार कहती है कि सबका साथ सबका विकास और सबका सम्मान होना चाहिए यहां तो फरेंदा सेंटर पर कुछ और ही देखने को मिल रहा है अभी जब सिर्फ यहां पर यहां हाल है तो बाकी खाद्य बीज सेंट्रो पर किसानों को खाद बीज के लिए कौन-कौन से जाेजन करने पड़ते होंगे यह किसी से छिपा नहीं है और आए दिन इस तरह की घटनाएं समाचार पत्रों में छप रही हैं लेकिन विभागीय और जिम्मेदार अधिकारी इन सब मामलों को संज्ञान में नहीं लेते हैं।

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