अभियान का चल रहा अंतिम चरण, छूटे हुए लोग कर लें दवाओं का सेवन

Spread the love


-फाइलेरिया से बचाव के लिए सरकार चला रही दवा सेवन अभियान
-28 के बजाय 31 अगस्त तक चलेगा अभियान
-मच्छरों से फैलने वाली फाइलेरिया है लाइलाज
गोंडा, 27 अगस्त 2025: फाइलेरिया आज भी दुनिया के 72 देशों में 85.60 करोड़ लोगों को प्रभावित कर रहा है। भारत में यह बीमारी 328 जिलों में फैली है, जिसमें अकेले उत्तर प्रदेश के 51 जिलों में इसका प्रभाव है।
मच्छरों से होने वाली यह गंभीर बीमारी गोंडा जिले में भी साफ दिखाई देती है। यहाँ 2065 फाइलेरिया मरीज पंजीकृत हैं। कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. सी.के. वर्मा के अनुसार, एक बार लक्षण आने के बाद यह जीवनभर की समस्या बन जाती है और मरीज को विकलांगता व आर्थिक बोझ झेलना पड़ता है। इससे बचाव का सबसे बेहतर उपाय है साल में एक बार फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन। यह दवा पूरी तरह सुरक्षित है और डब्लूएचओ द्वारा प्रमाणित है।
इसी उद्देश्य से सरकार प्रदेश के 27 जनपदों के 195 ब्लॉकों में 10 दिवसीय सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) अभियान चला रही है, जिसमें गोंडा के 12 ब्लॉक भी शामिल हैं। सीएमओ डॉ. रश्मि वर्मा ने जानकारी दी कि अभियान में अब तक 19.37 लाख से अधिक लोगों ने फाइलेरिया से बचाव की दवाएं सेवन कर ली हैं। त्यौहार और छुट्टियों को देखते हुए अभियान की अवधि 28 के बजाय 31 अगस्त तक बढ़ा दी गई है। दवा नज़दीकी आशा कार्यकर्ता या स्वास्थ्य केंद्र से सेवन की जा सकती है, लेकिन इसे खाली पेट न लें।

“यह अवसर साल में केवल एक बार आता है। अगर दवा नहीं ली तो खुद और परिवार को फाइलेरिया जैसी लाइलाज बीमारी के खतरे में डाल देंगे। इसलिए आज ही दवा खाकर खुद ही नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी इस बीमारी से बचा सकते हैं।”
प्रियंका निरंजन, जिलाधिकारी, गोंडा
फाइलेरिया रोधी दवाओं के लाभ-
• यह बीमारी मच्छरों से फैलती है, इसलिए किसी को भी हो सकती है।
• साल में एक बार दवा लेने से बीमारी का खतरा नहीं रहता।
• जब सभी लोग मिलकर दवा खाते हैं तो बीमारी का प्रसार रुक जाता है।
• दवाएं सुरक्षित हैं और डब्ल्यूएचओ से प्रमाणित हैं।
दवा सेवन के नियम-
• दवाओं की निर्धारित मात्रा एक साथ लें।
• दो वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों को दवा खानी चाहिए।
• गर्भवती महिलाएं, गंभीर बीमार व्यक्ति और दो साल से छोटे बच्चों को दवा नहीं लेनी है।
• दवा खाली पेट न लें।

दवा सेवन के बाद संभावित प्रतिक्रिया-

डॉ. सी.के. वर्मा के अनुसार मच्छर काटने के बाद फाइलेरिया के लक्षण प्रायः 10–15 साल बाद हाथ-पैर में सूजन के रूप में दिखते हैं, लेकिन शुरुआत में व्यक्ति सामान्य रहता है। लक्षण आने से पहले दवा खाने से शरीर में छिपे सूक्ष्म कृमि नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति बीमारी से सुरक्षित हो जाता है।
दवा सेवन की प्रक्रिया में कुछ लोगों को हल्का चक्कर, थकान, उल्टी या सुस्ती जैसी प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं, जो कुछ घंटों में स्वतः ठीक हो जाती हैं। यह दवा का दुष्प्रभाव नहीं, बल्कि कृमियों के नष्ट होने का संकेत है और वास्तव में यह एक अच्छी बात है। यदि ऐसे लोग दवा नहीं खाते, तो आगे चलकर उन्हें निश्चित रूप से फाइलेरिया हो जाता। किसी भी प्रकार की ज़्यादा परेशानी होने पर चिकित्सक और रैपिड रेस्पॉन्स टीम मदद के लिए उपलब्ध हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *