सिर्फ कागजों पर विकास, ज़मीनी सच्चाई बदहाल; पत्रकार से अभद्रता, सरकारी तालाब पर कब्जा

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खबर- विकास खंड कालाकांकर से
उत्तर प्रदेश सरकार के लाख निर्देशों और “जीरो टॉलरेंस” नीति के बावजूद ग्राम पंचायत सैलवारा में विकास योजनाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी हैं। एक ओर कागज़ों में फर्जी विकास दिखाकर लाखों की लूट की जा रही है, वहीं दूसरी ओर जब कोई पत्रकार सच्चाई उजागर करता है तो उसे धमकाया और अपमानित किया जाता है।

ग्राम पंचायत सैलवारा में मनरेगा घोटाला, बदहाल शौचालय, गंदगी से पटी पड़ी है नालियां, पत्रकार उत्पीड़न और सरकारी तालाब पर अवैध कब्जे जैसे गंभीर मामलों से भरा पड़ा है।

बता दे की 10 जून से 23 जून 2025 के बीच ‌ 2 कार्य कागज पर कराएं जा रहें हैं—

पहला – नन्हे पटेल के खेत से प्रमोद के खेत तक संपर्क मार्ग व।

दूसरा- राजू सरोज के खेत से श्रीवास्तव के बगल तक गूल खुदाई कार्य
को मनरेगा पोर्टल पर स्वीकृत दिखाया जा रहा है।

तथा इन कार्यों में 40 श्रमिकों की ऑनलाइन हाजिरी व मजदूरी का रिकॉर्ड दर्ज है। यहां तक कि कालाकांकर बीडीओ ने 12 जून को 23 मजदूरों द्वारा कार्य की पुष्टि भी की थी। लेकिन जब 14 जून को स्थानीय पत्रकार मौके पर पहुंचे तो एक भी फावड़ा नहीं चला मिला, न कोई मिट्टी खुदी और न कोई श्रमिक कार्यरत मिला।

गांव में बना सामुदायिक शौचालय गंदगी, बदबू और अनुपयोगिता का प्रतीक बन चुका है। यहां की महिलाएं अब भी खुले में शौच को मजबूर हैं।

गांव की नालियां वर्षों से नहीं साफ हुईं, जिससे मच्छर, कीड़े और संक्रामक रोग फैलने का खतरा बना हुआ है। बावजूद इसके, पंचायत रिकॉर्ड में “नियमित सफाई” दर्शाकर भुगतान निकाला जा चुका है।

14 जून को पत्रकार द्वारा निरीक्षण के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों से प्रधान को जब भ्रष्टाचार के पर्दाफाश होने का डर लगा, तो प्रधान पुत्र बाइक पर अपने दो अज्ञात साथियों के साथ पहुंचा और सरेराह पत्रकार को खबर ना चलाने की धमकी, देने लगा।

इस पर ग्रामीणों ने हस्तक्षेप किया तो प्रधान पुत्र मौके से भाग निकला। पत्रकार ने मानिकपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराने हेतु तहरीर दी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
गांव का पुराना सरकारी तालाब, जो कभी वर्षा जल संग्रहण और पशुओं के लिए सहारा था, अब अतिक्रमण की चपेट में है।वह तालाब की परिधि पर प्रधान के लोगों ने अवैध कब्जा कर निर्माण कर लिया हैं, जिससे जल स्रोत सिकुड़ता जा रहा है।
यह न सिर्फ पर्यावरणीय संकट है, बल्कि सार्वजनिक संपत्ति की खुली लूट भी है।

इन सभी घटनाओं और गड़बड़ियों को देखते हुए ग्रामीणों ने व पत्रकार संगठनों ने जिला अधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी से मांग की है कि वे स्वयं ग्राम पंचायत सैलवारा का स्थलीय निरीक्षण करें।

यदि जिलाधिकारी महोदय निष्पक्ष जांच कराते हैं तो यह मामला लाखों के घोटाले,व सत्ताश्रित दबंगई और जनविरोधी कार्यशैली को उजागर कर सकता है।

सामुदायिक शौचालय और नालियों की दुर्दशा

पत्रकार उत्पीड़न — यानी प्रेस की आज़ादी पर हमला

सरकारी तालाब पर अवैध कब्जा — प्राकृतिक संपदा खतरे में

प्रशासन की चुप्पी — न्याय की राह कठिन।
जैसे मुद्दों पर अब सभी की निगाहें मानिकपुर थाना, जिला प्रशासन और शासन पर हैं कि— क्या वे सैलवारा के इस ‘कागज़ी विकास’ पर लगाम लगाएंगे?
प्रतापगढ़ मानिकपुर से राकेश कुमार धुरिया की रिपोर्ट

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