तेलीबाग में कॉम्प्लेक्सों के मानकों पर सवाल बरकरार, खबर के बाद रिनोवेशन कार्य बंद; एलडीए की कार्रवाई का इंतजार

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पहली खबर प्रकाशित होने के दो दिन बाद रुका रिनोवेशन कार्य, एसबीआई कॉम्प्लेक्स के मालिक नरेंद्र प्रताप सिंह और दूसरे कॉम्प्लेक्स के संचालकों के नाम सामने आए; निर्माण, पार्किंग व अग्निसुरक्षा मानकों की जांच का इंतजार
*विशेष संवाददाता, लखनऊ।

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राजधानी लखनऊ के तेलीबाग क्षेत्र स्थित वीआईपी रोड, अवध नगर में बने कुछ व्यावसायिक कॉम्प्लेक्सों के निर्माण और सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं। मामले में पहले खबर प्रकाशित की गई थी, जिसके दो दिन बाद एक संचालित कॉम्प्लेक्स में चल रहा रिनोवेशन कार्य बंद कर दिया गया। हालांकि, संबंधित कॉम्प्लेक्सों के स्वीकृत नक्शे, पार्किंग और अग्निसुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रही शिकायतों पर अब तक किसी आधिकारिक कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है।
इस मामले में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया कॉम्प्लेक्स के मालिक एन.पी. सिंह (नरेंद्र प्रताप सिंह) का नाम सामने आया है। वहीं, दूसरे कॉम्प्लेक्स के संचालनकर्ताओं के रूप में किशोरी लाल रावत और अभिषेक रावत के नाम बताए गए हैं। संबंधित कॉम्प्लेक्सों के निर्माण और सुरक्षा मानकों को लेकर उठ रहे सवालों की वास्तविक स्थिति संबंधित विभागों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
खबर प्रकाशित होने के दो दिन बाद बंद हुआ रिनोवेशन कार्य
अवध नगर स्थित एक व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स में बैंक और कई दुकानों के संचालन के दौरान रिनोवेशन कार्य कराए जाने का मामला सामने आया था। आरोप था कि परिसर में ग्राहकों, दुकानदारों और कर्मचारियों की लगातार आवाजाही के बीच निर्माण कार्य कराया जा रहा था, जबकि सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल उठ रहे थे।
मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के दो दिन बाद कॉम्प्लेक्स में चल रहा रिनोवेशन कार्य बंद कर दिया गया। हालांकि, कार्य बंद होने के पीछे का आधिकारिक कारण अभी स्पष्ट नहीं है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि संबंधित विभाग ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया था या नहीं।
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या रिनोवेशन कार्य बंद होने के बाद संबंधित विभाग ने सुरक्षा व्यवस्था की जांच की और यदि की, तो उसकी रिपोर्ट में क्या सामने आया?
एसबीआई कॉम्प्लेक्स सहित अन्य परिसरों के मानकों की जांच कब?
तेलीबाग के वीआईपी रोड स्थित अवध नगर क्षेत्र में व्यावसायिक कॉम्प्लेक्सों के निर्माण और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर शिकायतें उठ रही हैं। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया कॉम्प्लेक्स के मालिक एन.पी. सिंह (नरेंद्र प्रताप सिंह) तथा दूसरे कॉम्प्लेक्स के संचालनकर्ताओं किशोरी लाल रावत और अभिषेक रावत के नाम सामने आने के बाद अब संबंधित परिसरों के मानकों की जांच को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ व्यावसायिक परिसरों में स्वीकृत मानचित्र, पर्याप्त पार्किंग और अग्निसुरक्षा जैसे जरूरी मानकों के अनुपालन की स्थिति स्पष्ट नहीं है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि अभी संबंधित विभागों की जांच से होनी बाकी है।
मुख्य सवाल यह है कि क्या लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने संबंधित कॉम्प्लेक्सों के स्वीकृत नक्शों और निर्माण संबंधी अनुमतियों की जांच की है? क्या अग्निशमन विभाग ने भवनों में आग से बचाव के इंतजामों का स्थलीय निरीक्षण किया है? क्या ग्राहकों, बैंक कर्मचारियों, दुकानदारों और अन्य नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं मौजूद हैं?
इन सवालों का जवाब संबंधित विभागों की आधिकारिक जांच और रिपोर्ट से ही सामने आ सकेगा।
दोबारा खबर प्रकाशित, अब कार्रवाई का इंतजार
मामले को लेकर दोबारा खबर प्रकाशित की जा रही है, ताकि संबंधित अधिकारियों का ध्यान इस ओर आकर्षित हो सके। स्थानीय लोगों की मांग है कि एलडीए और अग्निशमन विभाग संयुक्त रूप से मौके का निरीक्षण करें और संबंधित कॉम्प्लेक्सों के निर्माण, स्वीकृत मानचित्र, पार्किंग, अग्निसुरक्षा तथा अन्य आवश्यक मानकों की जांच कराएं।
यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि व्यावसायिक परिसरों में आने वाले आम नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो।
अब सबसे बड़ा सवाल—एलडीए कब करेगा कार्रवाई?
पहली खबर प्रकाशित होने के दो दिन बाद रिनोवेशन कार्य बंद हो गया, लेकिन संबंधित कॉम्प्लेक्सों के निर्माण और सुरक्षा मानकों की जांच को लेकर अब भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
क्या एलडीए और अग्निशमन विभाग मामले को गंभीरता से लेते हुए मौके पर निरीक्षण करेंगे? क्या संबंधित कॉम्प्लेक्सों के स्वीकृत नक्शे, पार्किंग और अग्निसुरक्षा व्यवस्था की जांच कराई जाएगी?
अब देखना यह है कि दोबारा खबर प्रकाशित होने के बाद संबंधित विभाग क्या कदम उठाते हैं और जांच के बाद क्या कार्रवाई सामने आती है। फिलहाल, स्थानीय लोगों को विभागीय जांच और आधिकारिक कार्रवाई का इंतजार है।

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