-20 हजार से अधिक लोगों की दूर हुईं भ्रांतियां
गोंडा, 25 अगस्त 2025: जिले में 17 परिवारों के 51 लोगों ने आखिरकार आशा कार्यकर्ता और पीएसपी टीम के समझाने पर फाइलेरिया से बचाव की दवा खा ली। तुलसीपुर कोडरी आयुष्मान आरोग्य मंदिर के अंतर्गत कुर्मी कड़वालिया गाँव के ये लोग तीन साल पहले हुई हल्की प्रतिक्रिया के डर से दवा लेने से हिचक रहे थे।
यह महज एक उदाहरण है। वीबीडी नोडल अधिकारी डॉ. सी.के. वर्मा ने बताया अभियान के दौरान शुरू में 32,822 लोग दवा सेवन करने से झिझक रहे थे, लेकिन सही जानकारी और जागरूकता से इनमें से 20,355 लोग यानि 91 फीसदी ने आखिरकार दवा खा ली।
कड़वालिया गाँव की शांति देवी ने बताया कि शुरू में डर था, पर सीएचओ और गाँववालों के समझाने व सरकारी वीडियो देखने के बाद परिवार सहित दवा खा ली। पीएसपी सदस्य राजकुमार ने बताया कि स्वास्थ्य कर्मी और गाँव वालों के सामूहिक प्रयास से परिवारों ने भरोसा जताया अब हमारे गाँव में दवा सेवन से कोई वंचित नहीं है।
पीएसपी की सक्रिय भूमिका-
जिले में पीएसपी (पेशेंट सपोर्ट ग्रुप) अभियान की बड़ी ताकत बनकर उभरे हैं। बेलसर, पडरी कृपाल, मसकनवा और नवाबगंज के 16 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में बने 324 सदस्यों वाले इन समूहों में 49 लोग खुद फाइलेरिया मरीज हैं। जो अपनी आप बीती साझा करने के साथ ही सरकारी वीडियो दिखाकर संकोची परिवारों को दवा खाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
घबराएँ नहीं, सुरक्षित हैं दवाएँ-
सीएमओ डॉ. रश्मि वर्मा ने कहा कि दवा सेवन बाद हल्का चक्कर या थकान आना सामान्य है। जो कुछ समय बाद स्वतः ठीक हो जाती है, यह इस बात का संकेत है कि शरीर में फाइलेरिया के सूक्ष्म कृमि मौजूद हैं, भले ही लक्षण अभी प्रकट न हुए हों। इसे दवा का दुष्प्रभाव मानना भ्रांति है। अधिक समस्या के लिए चिकित्सकों की टीम मौके पर पहुंचकर तत्काल इलाज मुहैया कराएगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि दवा न लेने पर सूक्ष्म कृमि व्यस्क हो जाते हैं, ऐसे लोग आगे चलकर न सिर्फ स्वयं फाइलेरिया से ग्रसित हो जाते हैं बल्कि मच्छरों के माध्यम से संक्रमण परिवार व समाज तक फैला सकते हैं। इसलिए हल्की प्रतिक्रिया के बावजूद सभी को दवा ज़रूर लेनी चाहिए, यही फाइलेरिया से बचाव का एकमात्र सुरक्षित उपाय है।
उन्होंने जानकारी दी कि 23 अगस्त तक 18.07 लाख से अधिक लोगों ने दवा खा ली है, जो लक्षित जनसंख्या 28,76,399 के सापेक्ष 62.8 प्रतिशत है। अभियान 28 अगस्त तक जारी रहेगा।
“फाइलेरिया उन्मूलन सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में है। इस अभियान को सफल बनाने में स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ पंचायत प्रतिनिधियों, कोटेदारों, आंगनबाड़ी, आशा कार्यकर्ताओं, शिक्षकों और अन्य सभी विभागों का सक्रिय सहयोग जरूरी है। समाज के हर वर्ग को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी व्यक्ति दवा खाने से वंचित न रहे। सामूहिक प्रयास से ही हम जिले को फाइलेरिया मुक्त बना सकते हैं।
प्रियंका निरंजन – जिलाधिकारी , गोंडा
