ब्यूरो नागेश गुप्ता
बरेली 27 जून । देश की अर्थव्यवस्था निरंतर मजबूती की ओर अग्रसर है और उसमें सबसे बड़ा योगदान जीएसटी का है। भारत के आर्थिक विकास में सबसे विशेष योगदान भारत के उद्यमियों ,व्यवसाईयों व लघु उद्योग संचालित करने वाली इकाइयों का है। बरेली भी उत्तर प्रदेश का उत्तम राजस्व देने वाला मंडल है। राज्य कर विभाग व्यापारियों की सेवा के लिए निरंतर कार्यरत है और यह विशेष ख्याल रखा जाता है कि किसी भी व्यापारी को विभागीय स्तर पर कोई परेशानी ना हो । यह कहना था उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल की कोर कमेटी की बैठक में पधारे जीएसटी के एडिशनल कमिश्नर ग्रेड 1 ओपी तिवारी का।
उन्होंने व्यापार मंडल का धन्यवाद देते हुए कहा कि उनके बरेली आगमन पर सभी अधिकारियों ने बताया कि व्यापार मंडल की भूमिका सदैव सकारात्मक रहती है।
उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के प्रांतीय महामंत्री राजेंद्र गुप्ता ने कहा कि देश के व्यापारियों और उद्यमियों की सोच सदैव राष्ट्र व प्रदेश को शिखर पर पहुंचाने की रहती है। व्यापारी प्रातः जल्दी ही अपना कार्य प्रारंभ कर देता है और देर रात तक व्यापारिक गतिविधियों में लीन रहता है। इसके पीछे उसकी सोच केवल उसके लाभ की ही नहीं होती है अपितु वह अपने कारोबार के माध्यम से अपने कर्मचारियों के लिए भी रोजगार का सृजन करता है, प्रदेश व देश के खजाने को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष कर के रूप में भरता है ताकि प्रदेश एक ट्रिलियन इकोनामी के लक्ष्य के साथ देश में नंबर एक रहे व भारत 5 ट्रिलियन इकोनामी के लक्ष्य को प्राप्त कर दुनिया के शीर्ष देशों में स्थापित हो। साथ ही साथ सभी सामाजिक सरोकारों में बढ़-चढ़कर अपनी भूमिका निभाता है। दान व चदे के माध्यम से धार्मिक अनुष्ठानो और आध्यात्मिक चेतना को भी जीवित रखने का कार्य करता है। डिप्टी कमिश्नर बृजेश ने कहा कि अब छोटे व्यापारियों को भी व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा को देखते हुए अपने आप को अपडेट कर लेना चाहिए । छोटे व्यापारियों को पंजीकरण करा लेना चाहिए तथा मध्यम वर्गीय व्यापारियों को प्रयास करना चाहिए कि अपने व्यापार में नई तकनीक का प्रयोग करके प्रतिस्पर्धा में बने भी रहे और साथ ही साथ जिन मानवीय तृतीय त्रुटियों की वजह से रास्ते में माल का परिवहन बाधित होता है उसकी चिंता से भी मुक्ति मिलेगी। महानगर महामंत्री राजेश जसोरिया ने विभागीय अधिकारियों का ध्यान पुराने लंबित वेट के मामलों में व्यापारियों को हो रही परेशानियों के बारे में बताया। उन्होंने कहा की वैट के समय में क्योंकि इनपुट क्रेडिट की कोई व्यवस्था नहीं थी ना ही जीएसटी की तरह पोर्टल था उस समय बिलों का फर्जीवाड़ा चरम पर था जिसका खामियाजा इमानदार व्यापारी आज तक भुगत रहा है ।उन मामलों में व्यापारी का पक्ष लेकर उनको समाप्त किया जाना चाहिए। विशिष्ट आमंत्रित अतिथि के रूप में पधारे प्रख्यात चार्टर्ड अकाउंटेंट संजय अग्रवाल ने कहा कि जीएसटी वैसे तो बहुत अच्छी कर प्रणाली है परंतु अब भी इसमें बहुत सारी विसंगतियां हैं जिनके कारण व्यापारियों को आर्थिक व मानसिक रूप से जूझना पड़ता है अभी ना तो ट्रिब्यूनल की व्यवस्था है और हाईकोर्ट जाने की स्थिति हर व्यापारी की होती नहीं है अतः उसके पास राहत पाने का कोई कल्याणकारी विकल्प नहीं है। इस वजह से बहुत सारे व्यापारी तो अवसाद में रहते हैं।
बैठक में महानगर कोषाध्यक्ष संजीव चांदना,अरविंद खंडेलवाल, राकेश अग्रवाल साबुन वाले, दर्शन लाल भाटिया दुर्गेश खटवानी, डिप्टी कमिश्नर जीएसटी बृजेश, आशुतोष गोयल, दिलीप गुप्ता, ईशान गुप्ता ,रचित गुप्ता, गिरधर देवनानी,प्रदीप राजानी आदि उपस्थित थे ।
