पिता की सजगता लाई रंग, बेटी ने दिया स्वस्थ बच्चे को जन्म
-समय पर जांच ने टाला बड़ा जोखिम, टीबी से उबरी गर्भवती महिला
गोंडा, 18 सितंबर 2026: छपिया ब्लॉक की 28 वर्षीय मालती के लिए तीसरी गर्भावस्था आसान नहीं थी। कई सप्ताह से बुखार उतर नहीं रहा था और खांसी भी बनी हुई थी। शरीर लगातार कमजोर हो रहा था। गांव के डॉक्टरों ने टायफाइड मानकर इलाज किया, लेकिन कोई राहत नहीं मिली।
आखिरकार मालती के पिता श्यामलाल, जो पेशे से राजमिस्त्री हैं, ने मोबाइल पर बेटी के लक्षणों के बारे में खोजबीन शुरू की। टीबी की आशंका होने पर वह बेटी को लेकर तत्काल छपिया सीएचसी पहुंचे। जांच में फेफड़ों की टीबी की पुष्टि हुई। उस समय मालती करीब चार माह की गर्भवती थीं।
परिवार को चिंता थी कि टीबी की दवाओं से गर्भ में पल रहे बच्चे को नुकसान न हो, लेकिन सीएचसी छापिया के चिकित्सकों ने सुरक्षित इलाज का भरोसा दिया। करीब छह माह चले नियमित उपचार के बाद मालती टीबी से पूरी तरह उबर गईं। इसी दौरान उन्होंने अस्पताल में अपने तीसरे बच्चे को जन्म दिया। अब बच्चा करीब साढ़े सात माह का है और पूरी तरह स्वस्थ है। जन्म से ही वह मां का दूध पी रहा है और स्तनपान अब भी जारी है।
इलाज में देरी बढ़ा सकती है जोखिम-
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. आदित्य वर्मा ने बताया कि गर्भावस्था में टीबी के इलाज में देरी से मां और बच्चे दोनों के लिए जोखिम बढ़ सकता है। मां में गंभीर एनीमिया और प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव, जबकि शिशु में कम वजन और समय से पहले जन्म की आशंका रहती है।
इसके लिए प्रसव पूर्व जांच के लिए आने वाली हर गर्भवती में टीबी के संभावित लक्षणों की पहचान के निर्देश दिए गए हैं। आशा और एएनएम कार्यकर्ता दो सप्ताह से अधिक खांसी, बुखार, वजन घटने और रात में पसीना आने जैसे लक्षणों पर नजर रखती हैं। लक्षण मिलने पर आगे की जांच के लिए भेजा जाता है।
1.61 लाख से अधिक गर्भवती की स्क्रीनिंग-
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मंडलीय प्रबंधक राहुल पटेल के मुताबिक अप्रैल से जुलाई के बीच देवीपाटन मंडल के चारों जिलों में 1.61 लाख से अधिक गर्भवती महिलाओं की टीबी स्क्रीनिंग हुई। इनमें 281 में टीबी के संभावित लक्षण मिले। गोंडा में 65,787 की स्क्रीनिंग में 43, बहराइच में 51,707 में 13, बलरामपुर में 30,655 में 32 और श्रावस्ती में 13,527 गर्भवती महिलाओं में 193 में संभावित लक्षण पाए गए। सभी को जांच के लिए भेजा गया।
“गर्भावस्था में टीबी की समय पर पहचान और उपचार मां के साथ गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण है। मरीज को चिकित्सकीय सलाह के बिना दवाएं बीच में बंद नहीं करनी चाहिए। उपचार के दौरान निक्षय पोषण योजना के तहत हर माह मिलने वाली एक हजार रुपये की पोषण सहायता भी नियमित इलाज जारी रखने में मदद करती है।“
— डॉ. संतलाल पटेल, प्रभारी अपर निदेशक, देवीपाटन मंडल
