अर्शद/उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के कामता चौराहे पर इन दिनों डग्गामार वाहनों का संचालन खुलेआम जारी है। आरोप है कि ट्रैफिक पुलिस की मौजूदगी में ही अवैध तरीके से सवारियां भरी जा रही हैं, जिससे न सिर्फ यातायात व्यवस्था चरमरा रही है बल्कि सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों और सूत्रों के मुताबिक कामता चौराहा अब जाम का बड़ा केंद्र बन चुका है। सुबह से लेकर देर रात तक सड़क किनारे खड़े डग्गामार वाहन खुलेआम सवारियां भरते नजर आते हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर ट्रैफिक पुलिस की आंखों के सामने यह पूरा खेल कैसे चल रहा है।
सूत्रों का दावा है कि डग्गामार वाहन संचालकों द्वारा कथित रूप से सुविधा शुल्क देकर कार्रवाई से बचा जा रहा है। यही वजह है कि नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाने के बावजूद इन वाहनों पर कोई सख्त कार्रवाई देखने को नहीं मिल रही।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अवैध वाहनों की वजह से कामता चौराहे पर हर समय लंबा जाम लगा रहता है, जिससे आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। स्कूल जाने वाले बच्चों, ऑफिस कर्मचारियों और मरीजों तक को घंटों ट्रैफिक में फंसना पड़ रहा है।
मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति के बावजूद राजधानी में इस तरह की अव्यवस्थाएं कई सवाल खड़े कर रही हैं। आरोप है कि कुछ ट्रैफिक कर्मी नियमों को दरकिनार कर अपनी जिम्मेदारियों का सही ढंग से निर्वहन नहीं कर रहे, जिससे शासन की छवि भी प्रभावित हो रही है।
अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर ट्रैफिक डीसीपी रवीना त्यागी इस पूरे मामले पर कब संज्ञान लेंगी और अवैध डग्गामार वाहनों के खिलाफ कब बड़ी कार्रवाई होगी। राजधानी की जनता अब सख्त कदम उठाए जाने की मांग कर रही है।
