जागरूकता की कमी और अस्पतालों की दूरी के कारण टीबी की पहचान अक्सर देर से होती थी, जिससे मरीज की स्थिति गंभीर हो जाती थी और संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ता था। लेकिन दिसंबर 2024 से चल रहे सघन टीबी खोज अभियान के तहत अब स्वास्थ्य टीमें सीधे गांवों में पहुंचकर जोखिम समूहों की मौके पर स्क्रीनिंग कर रही हैं। इसके परिणामस्वरूप वर्ष 2015 की तुलना में प्रति एक लाख आबादी पर टीबी मरीजों की संख्या और मृत्यु दर—दोनों में 17–17 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
इसी क्रम में गोंडा सहित प्रदेश के 54 जिलों में चल रहे सौ दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान-2 के तहत गांव स्तर पर विशेष स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से जांच की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। एआई तकनीक से लैस पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों और मोबाइल मेडिकल यूनिट के जरिए ग्रामीणों की मौके पर स्क्रीनिंग, एक्स-रे और जरूरत पड़ने पर बलगम जांच की जा रही है। साथ ही शुगर, बीपी और बीएमआई की निःशुल्क जांच भी की जा रही है, जिससे मरीजों की समय रहते पहचान संभव हो रही है।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ जय गोविंद के अनुसार 24 मार्च से शुरू हुए अभियान में 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों, तंबाकू-शराब सेवन करने वालों, मधुमेह रोगियों, कुपोषित बच्चों और पूर्व टीबी मरीजों पर विशेष फोकस किया जा रहा है। जिले में 456 आरोग्य शिविर लगाने का लक्ष्य निर्धारित है, जिनमें से अब तक 66 शिविर आयोजित कर 5896 लोगों की स्क्रीनिंग, 19453 एआई आधारित एक्स-रे और 1012 बलगम जांच की जा चुकी है। इनमें 179 मरीजों में टीबी की पुष्टि कर उपचार शुरू कराया गया है।
इस बदलाव में आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका भी अहम रही है। मुंजेहना की आशा कार्यकर्ता जामवंती बताती हैं कि गांव में ही शिविर लगने से लोगों को जांच के लिए प्रेरित करना पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है।
मुंजेहना के एक 55 वर्षीय लाभार्थी ने बताया कि लगभग एक महीने से सूखी खांसी होने के बावजूद वे इसे धूम्रपान की सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर रहे थे, लेकिन गांव में ही एक्स-रे सुविधा मिलने से समय पर जांच हो सकी और रिपोर्ट के आधार पर उपचार शुरू किया जाएगा।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ संतलाल पटेल का कहना है कि चुनौतियां अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं, लेकिन शुरुआती संकेत उत्साहजनक हैं। तकनीकी नवाचार, सामुदायिक सहयोग और विभाग की सक्रिय रणनीति से टीबी नियंत्रण की दिशा में और बेहतर परिणाम मिलने की उम्मीद है।
तकनीकी नवाचार और रणनीतिक प्रयासों से आसान हो रही टीबी मुक्ति की राहगोंडा, 23 अप्रैल 2026: एक समय
