गोरखपुर के कैंपियरगंज क्षेत्र में शहर और देहात में बड़े पैमाने पर

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गोरखपुर के कैंपियरगंज क्षेत्र में शहर और देहात में बड़े पैमाने पर फिटनेस सेंटर चल रहे हैं जो युवाओं को भ्रमित कर उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं अब सवाल यह उठता है कि इनका रजिस्ट्रेशन जिला प्रशासन में होता भी है या नहीं हर चौराहा और ग्रामीण अंचलों में बड़े-बड़े होर्डिंग फ्लेक्स लगाकर प्रचार प्रसार युवाओं के सेहत के साथ बड़े पैमाने पर खिलवाड़ किया जा रहा है कहीं-कहीं तो समाज के जिम्मेदार इसका उद्घाटन करते भी दिखते हैं लेकिन उनसे अगर फिटनेस सेंटर के बारे में जानकारी प्राप्त करना चाह जाए तो उनको पता ही नहीं होता यह क्या है। यह हम नहीं कह रहे हैं इस क्षेत्र में जो जानकार हैं उनकी बातों को सुना और कहा जा रहा है। पुराने जमाने में कबड्डी खो खो, फुटबॉल, बैडमिंटन, और तमाम खेलों के साथ पहलवानी ,यह सब जमीन से जुड़े हुए होते थे। पहले के जमाने में विद्यालयों में इस तरह के खेल भी हुआ करते थे ताकि विद्यालय के छात्र और छात्राएं भी स्वस्थ रहें ।इन जगहों से जो पहलवान निकलते थे उनका अपना एक नाम होता था सरकार नौकरी में इनको सुविधा भी देती थी।अब एक और परंपरा देखने को मिलती है की लाइट के उजालों में फिटनेस सेंटर हर चौराहे पर और देहात क्षेत्र में आपको मौजूद मिलेंगे। इन पहलवान टाइप की युवाओं का समाज के अन्य गतिविधियो के साथ गलत कार्यों में दुरुपयोग भी किया जाता है।युवाओं और युवतियों पर सेहत के संबंध में कितना लाभप्रद हो रहा है यह हम और आप नहीं बता सकते। इस संबंध में जब क्षेत्र की युवाओं और समाज के जिम्मेदार लोगों के साथ ही अधिकारियों से बातचीत करने का प्रयास किया गया तो उनके विचार अलग-अलग सामने आए। आजकल बाजार में बहुत सारे ऐसे फूड सप्लीमेंट है अब वह मानक अनुकूल हैं या विपरीत है यह भी नहीं बता सकते। चर्चा यह भी है कि फूड सप्लीमेंट मनमाने ढंग से बिकते भी हैं इस पर जिला प्रशासन या तहसील प्रशासन का कोई प्रतिबंध भी नहीं दिखाई देता है।यह तो स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ही बता सकते हैं इस पर ना तो कभी जांच होती है और ना ही पड़ताल होती है क्योंकि जनपद के अधिकारियों को इस बारे में ना तो पता है और ना ही विभागीय कोई इंटरेस्ट है अब सवाल यह उठता है कि जिस फूड सप्लीमेंट को प्रयोग करने पर उसके लाभ मिलते हैं या नहीं यह हम नहीं कर सकते हैं ना ही इसके बारे में फिटनेस सेंटर वाले कोई जानकारी देते हैं क्योंकि उनको खुद ही नहीं पता होता है।सेहत बनाना हर व्यक्ति की अधिकार है लेकिन अगर सेहत के साथ खिलवाड़ हो और तो उसको क्या कहा जा सकता है। अब देखना यह है कि इस खबर के बाद तहसील प्रशासन अपनी गहरी निद्रा को तोड़ता है या क्षेत्र के युवाओं और युवतियों को ऐसे ही फिटनेस सेंटर जैसे धंधे में फिटनेस बनाने के लिए छोड़ देता है।

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