सीएसआईआर में प्रस्तुति देते पद्मश्री रोनू मजूमदार।
लखनऊ। उनके होठों को छूकर बांसुरी ने ऐसे सुर छेड़े कि सुनने वाले बस आंखें बंदकर आनंद के सागर में डूब गए। ठुमक चलत रामचंद्र बाजत पैजनियां… पर मुरली ने जब तान छेड़ी तो पूरा हॉल भक्तिरस में सराबोर हो गया। वहीं, जब सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा… गूंजा तो देशभक्ति का जज्बा हिलोरें मारने लगा।
मौका था सीएसआईआर (सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टीट्यूट) में आयोजित समारोह का, जहां विश्वविख्यात बांसुरी वादक पद्मश्री पंडित रोनू मजूमदार ने अपने वादन से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
सीतापुर रोड पर जानकीपुरम एक्सटेंशन में स्थित सीएसआईआर के प्रेक्षागृह में बृहस्पतिवार को सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। इस दौरान पंडित रोनू मजूमदार ने सबसे पहले राग
सीएसआईआर में पद्मश्री पंडित रोनू मजूमदार के बांसुरी वादन ने श्रोताओं को किया मंत्रमुग्ध
मंगल भैरव से शुरुआत की। अमूमन कम सुने जाने वाले इस राग के सूक्ष्म अलाप से ही उन्होंने श्रोताओं पर जादू सा कर दिया। उनके साथ रूपक भट्टाचार्य ने तबले पर और शिष्य कल्पेश ने बांसुरी पर बखूबी संगत की।
इस दौरान देश-विदेश के करीब आठ सौ डेलीगेट्य प्रेक्षागृह में मौजूद रहे और उन्होंने पंडित रोनू मजूमदार के वादन का अंतर्मन से आनंद उठाया। इस अवसर पर संस्थान की निदेशक डॉ. राधा रंगराजन, कार्यक्रम के संयोजक डॉ. दीपांकर कोले, अमेरिका से आए प्रो. कंटने एल्ड्रिक, आस्ट्रेलिया से प्रो. क्रिस्टीन, डॉ. अमोघ सहस्त्रबुद्धे और हास्य-व्यंग्य कवि पंकज प्रसून आदि श्रोता मौजूद रहे।
