छत्तीसगढ़ संगीत नृत्य महोत्सव–चैप्टर 3 का भव्य समापन

पद्मविभूषण स्वर्गीय तीजन बाई की कला-स्मृति को समर्पित रहा दो दिवसीय महोत्सव

लोक एवं शास्त्रीय कला, संगीत, नृत्य और छत्तीसगढ़ी संस्कृति के विविध रंगों ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

सुनील चिंचोलकर
बिलासपुर, छत्तीसगढ़। संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन एवं SECL के विशेष सहयोग तथा श्री साईनाथ,नृत्यधारा फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “छत्तीसगढ़ संगीत नृत्य महोत्सव–चैप्टर 3” का दो दिवसीय भव्य एवं गरिमामय आयोजन पं. देवकीनंदन दीक्षित ऑडिटोरियम, शनिचरी बाजार, बिलासपुर में हुआ। इस वर्ष का महोत्सव छत्तीसगढ़ की महान लोक कलाकार एवं पद्मविभूषण स्वर्गीय तीजन बाई की अमिट कला-स्मृति को समर्पित रहा।
दो दिनों तक चले महोत्सव में शास्त्रीय नृत्य, लोकनृत्य, लोकसंगीत, पंडवानी, छत्तीसगढ़ी हास्य, परिचर्चा तथा पारंपरिक एवं जनजातीय संस्कृति की विविध प्रस्तुतियों ने दर्शकों को छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराया। कला-प्रेमियों की उत्साहपूर्ण उपस्थिति और कलाकारों की शानदार प्रस्तुतियों ने पूरे आयोजन को यादगार बना दिया।

दीप प्रज्वलन के साथ हुआ महोत्सव का शुभारंभ

महोत्सव का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। प्रथम दिवस के मुख्य अतिथि पूर्व राजभाषा आयोग अध्यक्ष एवं राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त डॉ. विनय कुमार पाठक रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ समाज सेविका रश्मीलता मिश्रा, नगर निगम पार्षद अंचल दुबे, नितिन त्रिपाठी, प्राचार्या निवेदिता सरकार सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
प्रथम दिवस में नृत्यधारा डांस अकादमी एवं शिव शक्ति कला संस्थान द्वारा कथक नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां दी गईं। वहीं छत्तीसगढ़ी हास्य कलाकार डॉ. उर्वशी साहू एवं उपासना वैष्णव (दुर्ग) ने हास्य प्रस्तुतियों से दर्शकों का मनोरंजन किया।
कला एवं संस्कृति से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर परिचर्चा सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें प्रमोद साहू (रायपुर) एवं भावेश देशमुख (खैरागढ़) ने कला, लोक परंपराओं एवं छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत से जुड़े विषयों पर विचार साझा किए। पंडवानी गायिका दुर्गा साहू एवं दाल नीनवा की प्रस्तुतियों ने लोकधारा की जीवंतता को मंच पर साकार किया।

तीजन बाई की स्मृति में अर्पित की गई श्रद्धांजलि

द्वितीय दिवस के समापन अवसर पर पद्मविभूषण स्वर्गीय तीजन बाई को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उनकी स्मृति में दो मिनट का मौन रखकर उनकी कला-साधना और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान के लिए उनके अतुलनीय योगदान को स्मरण किया गया।
इस अवसर पर तीजन बाई के परिवार से उपस्थित उनकी बहू सावित्री पारधी, पोती सुश्री भावना पारधी एवं अन्य परिजनों का मंच से सम्मान किया गया।
तीजन बाई ने पंडवानी को देश-दुनिया में विशिष्ट पहचान दिलाकर छत्तीसगढ़ की लोककला को गौरवान्वित किया। उनकी कला-स्मृति को समर्पित यह महोत्सव उनकी सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में सार्थक प्रयास रहा।
समापन दिवस पर मुख्य अतिथि भागवत प्रसाद तथा विशिष्ट अतिथि नगर निगम पार्षद अंचल दुबे, राजेंद्र पाण्डेय, सावित्री पारधी एवं अंतरा चक्रवर्ती सहित अनेक गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।

शास्त्रीय और लोकनृत्यों की प्रस्तुतियों ने बांधा समां

समापन दिवस पर नृत्यधारा डांस अकादमी द्वारा भारत के विभिन्न शास्त्रीय एवं लोकनृत्यों की रंगारंग प्रस्तुतियां दी गईं। श्री साई नृत्य निलयम, बिलासपुर द्वारा प्रस्तुत भरतनाट्यम ने अपनी शास्त्रीय गरिमा, भाव-भंगिमा एवं नृत्य तकनीक से दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।
वहीं लोक मंथन, कसडोल के कलाकारों ने आदिवासी लोकनृत्य के माध्यम से छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति और लोकजीवन की जीवंत झलक प्रस्तुत की। गेड़ी नृत्य ने प्रदेश की पारंपरिक लोक विरासत को मंच पर जीवंत किया।
चिन्हारी मॉडल्स द्वारा छत्तीसगढ़ी वेशभूषा पर आधारित रैम्प वॉक भी आयोजन का विशेष आकर्षण रहा। इसमें प्रदेश की पारंपरिक एवं आदिवासी वेशभूषा और संस्कृति के विविध रंग देखने को मिले।

निलेश जोगी के लोकगीतों पर झूमा सभागार

समापन दिवस के प्रमुख आकर्षण प्रसिद्ध लोक गायक निलेश जोगी रहे। उनकी सुमधुर एवं जोशीली लोक गायन प्रस्तुति ने पूरे सभागार को छत्तीसगढ़ी लोकसंगीत के रंग में रंग दिया। उनकी प्रस्तुति पर दर्शकों ने जमकर तालियां बजाईं और उत्साहपूर्वक आनंद लिया।
दोनों दिनों में कलाकारों ने अपनी प्रतिभा, साधना और ऊर्जा से छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक एवं शास्त्रीय कला परंपरा की शानदार झलक प्रस्तुत की। नृत्य की भाव-भंगिमाओं से लेकर लोकगीतों की मिठास और पारंपरिक लोककलाओं की जीवंतता तक, महोत्सव में छत्तीसगढ़ी संस्कृति के अनेक रंग देखने को मिले।

नई पीढ़ी को सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना है उद्देश्य

आयोजक आशीष राज सिंघानिया एवं आंचल पाण्डेय ने कहा कि “छत्तीसगढ़ संगीत नृत्य महोत्सव” का उद्देश्य प्रदेश की लोक एवं शास्त्रीय कलाओं को सशक्त एवं साझा मंच प्रदान करना, कलाकारों की प्रतिभा को सम्मान और प्रोत्साहन देना तथा नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना है।
उन्होंने कहा कि संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन एवं SECL के विशेष सहयोग से आयोजित यह महोत्सव प्रदेश की कला एवं संस्कृति को व्यापक मंच प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। लोककलाओं, संगीत, नृत्य एवं कलाकारों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने तथा विलुप्त होती लोक परंपराओं के संरक्षण के प्रयास निरंतर जारी रहेंगे।
तीजन बाई की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प
आयोजकों ने कहा कि स्वर्गीय तीजन बाई जैसी महान कलाकारों की कला-साधना छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक अस्मिता की अमूल्य धरोहर है। उनके प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करते हुए महोत्सव को उनकी स्मृति को समर्पित करना आयोजन के लिए गौरव का विषय रहा।
संगीत, नृत्य, लोककला, शास्त्रीय विधाओं, परिचर्चा, हास्य एवं पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सजे इस दो दिवसीय आयोजन ने बिलासपुर के कला-प्रेमियों को यादगार सांस्कृतिक अनुभव प्रदान किया।
कलाकारों की उत्कृष्ट प्रस्तुतियों, अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति और दर्शकों के उत्साह के बीच “छत्तीसगढ़ संगीत नृत्य महोत्सव–चैप्टर 3” का भव्य समापन हुआ। महोत्सव ने न केवल छत्तीसगढ़ की समृद्ध कला-संस्कृति को मंच प्रदान किया, बल्कि स्वर्गीय तीजन बाई की अमिट कला-स्मृति को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए उनकी सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश भी दिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *