काकोरी क्रांति के 101 वर्ष पूर्ण होने पर अमर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि

Spread the love

लखनऊ। अखिल भारत नागरिक परिषद के नेतृत्व में कर्मचारी, शिक्षक, बुद्धिजीवी एवं आम नागरिकों ने आज काकोरी स्थित शहीद स्मारक पर काकोरी क्रांति के 101 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर अमर शहीदों को श्रद्धा-सुमन अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले काकोरी के अमर क्रांतिकारियों को नमन करते हुए उनके संघर्ष, साहस और राष्ट्रप्रेम को याद किया गया।

इस अवसर पर ऑल इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने 101 वर्ष पूर्व काकोरी में हुई ऐतिहासिक ट्रेन एक्शन की घटना का जीवंत वर्णन करते हुए काकोरी क्रांति के अमर शहीदों के जीवन और उनके अदम्य साहस पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि काकोरी क्रांति में किसी अंग्रेज की हत्या नहीं की गई थी, लेकिन इस घटना से ब्रिटिश हुकूमत इस कदर भयभीत हो गई थी कि उसने क्रांतिकारियों पर कठोर मुकदमा चलाकर पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, राजेंद्र लाहिड़ी और ठाकुर रोशन सिंह को फांसी की सजा दे दी। काकोरी कांड के प्रमुख क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद को भी ब्रिटिश सरकार गिरफ्तार नहीं कर सकी। अंततः 27 फरवरी 1931 को प्रयागराज में अंग्रेजी हुकूमत से आमने-सामने संघर्ष करते हुए उन्होंने अपने प्राण न्योछावर कर अमरत्व प्राप्त किया।

शैलेंद्र दुबे ने बताया कि काकोरी कांड के क्रांतिकारियों को लखनऊ जेल में रखा गया था और उनके विरुद्ध मुकदमा हजरतगंज स्थित रिंक थिएटर में चलाया गया था। आज उसी स्थान पर जीपीओ स्थित है और वहां काकोरी क्रांति की स्मृति में काकोरी स्तंभ स्थापित है। इस स्तंभ पर काकोरी क्रांति में शामिल क्रांतिकारियों के नाम, उन्हें दी गई सजाओं का विवरण तथा इस ऐतिहासिक मुकदमे में निःशुल्क पैरवी करने वाले अधिवक्ताओं के नाम भी अंकित हैं।

उन्होंने कहा कि काकोरी क्रांति केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम में युवाओं के अदम्य साहस, त्याग, देशभक्ति और ब्रिटिश साम्राज्यवाद के विरुद्ध संघर्ष का प्रतीक है। अमर शहीदों का जीवन आज भी देशवासियों को राष्ट्रहित में त्याग और संघर्ष की प्रेरणा देता है।

इस अवसर पर अखिल भारत नागरिक परिषद की महामंत्री रीना त्रिपाठी ने काकोरी क्रांति के ऐतिहासिक संदर्भ और उसके राष्ट्रीय महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले क्रांतिकारियों की स्मृति को जीवंत रखना और नई पीढ़ी को उनके संघर्ष से परिचित कराना हम सभी का दायित्व है।

अमर शहीदों को श्रद्धा-सुमन अर्पित करने वालों में प्रमुख रूप से सरजू त्रिवेदी, गीता वर्मा, अर्चना शुक्ला, उषा त्रिपाठी, ममता मिश्रा सहित कर्मचारी, शिक्षक, बुद्धिजीवी एवं आम नागरिक उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *