पप्पू यादव द्वारा संसद में भगवान राम और सनातन धर्म के अपमानजनक व्यवहार के

Spread the love

पप्पू यादव द्वारा संसद में भगवान राम और सनातन धर्म के अपमानजनक व्यवहार के विरोध में जिला अध्यक्ष विधि प्रकोष्ठ महिला रचना देवगन एडवोकेट, जिला अध्यक्ष महिला मोर्चा नूपुर बैनर्जी व जिला महासचिव विधि प्रकोष्ठ अभिषेक अवस्थी इस कृत्य का कड़ा विरोध दर्ज करते हुए अपने अपने विचार व्यक्त करते किया

लखनऊ। जिला अध्यक्ष विधि प्रकोष्ठ महिला रचना देवगन एडवोकेट, अखिल भारतीय हिन्दू महासभा नुपुर बैनर्जी आप सभी से ये कहना चाहती हैं कि भगवा वस्त्र केवल एक रंग नहीं, बल्कि हमारी सनातन संस्कृति, त्याग, तपस्या और संत परंपरा का पवित्र प्रतीक है। इसका किसी भी प्रकार से राजनीतिक प्रदर्शन या स्वार्थ के लिए उपयोग अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। हम लोकतंत्र में सभी के विरोध के अधिकार का सम्मान करते हैं, लेकिन धार्मिक आस्था और प्रतीकों का सम्मान करना भी प्रत्येक नागरिक और जनप्रतिनिधि का कर्तव्य है। हम मांग करते हैं कि भविष्य में ऐसे कृत्यों की पुनरावृत्ति न हो और धार्मिक प्रतीकों की गरिमा हर परिस्थिति में बनाए रखी जाए। अखिल भारतीय हिंदू महासभा सदैव सनातन धर्म, राष्ट्रहित और समाज की सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहेगी। वहीं नूपुर बैनर्जी, जिला अध्यक्ष महिला मोर्चा, अखिल भारतीय हिन्दू महासभा, लखनऊ का कहना है कि भगवा केवल एक वस्त्र या रंग नहीं है, यह सनातन संस्कृति की आत्मा, त्याग, तपस्या, सेवा, राष्ट्रभक्ति और आध्यात्मिक चेतना का दिव्य प्रतीक है। हमारी संत परंपरा ने इसी भगवा ध्वज और भगवा वेश के माध्यम से समाज को सत्य, धर्म और राष्ट्रसेवा का मार्ग दिखाया है। हमारा उद्देश्य समाज में वैमनस्य नहीं, बल्कि सम्मान, जागरूकता और सांस्कृतिक मर्यादाओं की रक्षा करना है साथ ही संगठन के जिला महासचिव अभिषेक अवस्थी जी ने कहा कि हम लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का पूर्ण सम्मान करते हैं। किंतु प्रत्येक अधिकार के साथ संवैधानिक मर्यादा और सामाजिक उत्तरदायित्व भी जुड़ा होता है। हालांकि अखिल भारतीय हिंदू महासभा का मानना है कि सभी सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्तियों को धार्मिक आस्थाओं और सांस्कृतिक प्रतीकों के प्रति संवेदनशील एवं उत्तरदायी व्यवहार करना चाहिए। हम अपेक्षा करते हैं कि भविष्य में ऐसे किसी भी कृत्य से बचा जाए जिससे समाज में अनावश्यक विवाद उत्पन्न हो। समाज के सभी वर्गों से हमारा आग्रह है कि हमारी सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करें और राष्ट्रीय एकता एवं सामाजिक सौहार्द को सर्वोच्च प्राथमिकता दें .

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *