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जश्ने मोहसिने क़ायनात में उलेमा ने की क़ौम से अपील
संवाददाता
बहेड़ी।मुस्लिम मुआशरे में फैली बदअमली उनकी मौजूदा हालात की ज़िम्मेदार है.हम उस नबी के उम्मती हैं,जिसने समाज में फैली तमाम बुराइयों
को मिटाकर उजाला ला दिया.गरीब-अमीर,छोटे-बड़े और ऊंच-नीच का फर्क मिटा दिया.आज हम उसी नबी की विलादत का जश्न मना रहे हैं,और हम सबको चाहिए कि प्यारे नबी के बताए रास्ते पर चलने का अहद लें.यक़ीन जानिए हमारे आमाल दुरुस्त होते ही सब कुछ सही हो जाएगा.
मौलाना शारिफ़ का यह बयान यहां
ईद मिलादुन्नबी के मौके पर अंजुमन खुद्दामे औलिया की जानिब से आयोजित जश्ने मोहसिने कायनात में हुआ.उन्होंने हुज़ूर की सीरत पर तफ़सील से बात की,और बताया कि उनकी आमद के वक़्त समाज का क्या हाल था,और उनके आने के बाद समाज में किस तरह से बदलाव आया.
प्रोग्राम की सदारत कर रहे मौलाना व हाफ़िज़ अनवार अहमद ने कहा कि आज हर तरफ एक अजीब माहौल बना हुआ है.समाज में वह काम हो रहे हैं,जिनका नतीजा खराब ही आने वाला है.प्यारे नबी से मोहब्बत का दावा करने वाले हम लोग उनके बताए तरीके के खिलाफ काम कर रहे हैं.हमें चाहिए कि हम अपने आमालों पर संजीदगी से गौर करें,तो हमको आसानी से समझ आ जाएगा कि हमारा बुरा हाल क्यों है.हम किसी की नक़ल करने वालों में से नहीं. नबी का बताया हुआ इस्लाम का अपना एक शानदार रास्ता है,हमें उस पर ही चलना चाहिए.
हाफ़िज़ ज़ुल्फ़िक़ार की तिलावते कुरान पाक से जलसे का आग़ाज़ हुआ.शायर जमील खैराबादी का शेर,खूब पसंद किया गया.
फूल हो,खुशबू हो,क्या हो तुम
नाम से ही घर मुनव्वर हो गया.
मुफ़्ती हसनैन मंज़री,मौलाना राशिदुल क़ादरी,मौलाना साबिर मियां,मौलाना खालिद मियां ने भी सरकार की सीरत पर रोशनी डाली.शायर उस्मान मंज़री व शादाब नूरी ने भी कलाम पेश किया.सरपरस्ती खानकाहे शेरिया के फरीद मियां और निज़ामत के फ़रायज़ नाज़िर रज़ा और हाफिज अज़ीम शेरी ने अदा किए.
इस प्रोग्राम की खास बात मौलाना हाफ़िज़ अनवार अहमद का प्रोग्राम में शामिल होना रहा.करीब 20 साल बाद वह दोबरह इस स्टेज पर वापस हुए.खालिद मियां की पहल पर हुए समझौते के बाद उनकी इस प्रोग्राम में शिरकत होने से लोगों को काफी अच्छा महसूस हुआ.जुलूसे मोहम्मदी में भी उन्होंने अपने पुराने अंदाज़ से लोगों को खिताब किया.
