लखनऊ। क्रिकेट का मैदान खिलाड़ियों की मेहनत से सजता है, लेकिन किसी भी बड़े खेल आयोजन की आवाज़ करोड़ों लोगों तक पहुंचाने का काम मीडिया करता है। UPT20 लीग सीज़न-4 में भी पत्रकार और मीडिया कर्मी लगातार मैदान से खबरें, तस्वीरें और वीडियो दर्शकों तक पहुंचाने में जुटे हैं।
लेकिन इसी बीच मीडिया जगत में एक ऐसा सवाल उठ रहा है, जिसने कई पत्रकारों को अंदर तक झकझोर दिया है।
बताया जा रहा है कि कुछ मीडिया कर्मियों को UPCA की ओर से UPT20 की T-Shirt, Cap, Water Bottle, Power Bank और Bag दिए गए। आरोप है कि कुछ लोगों तक ये सामान उनके घर तक भी पहुंचाया गया। वहीं कई अन्य मीडिया कर्मियों को इसकी जानकारी तक नहीं मिली।
सवाल सामान का नहीं है… सवाल सम्मान का है।
जो पत्रकार घंटों मैदान में खड़े होकर मैच कवर करता है, जो बारिश और गर्मी की परवाह किए बिना खबर जुटाता है, जो अपनी मेहनत से लीग की तस्वीर जनता तक पहुंचाता है—क्या उसके सम्मान का हक भी बराबर नहीं होना चाहिए?
एक मीडिया कर्मी किसी आयोजन में सिर्फ कैमरा लेकर नहीं आता। वह अपनी मेहनत, समय और पेशेवर जिम्मेदारी लेकर आता है।
फिर सवाल उठता है—
अगर सम्मान था, तो सबके लिए क्यों नहीं?
अगर कोई व्यवस्था थी, तो उसकी जानकारी सभी अधिकृत मीडिया कर्मियों को क्यों नहीं दी गई?
और अगर यह सिर्फ चुनिंदा लोगों के लिए था, तो चयन का आधार3 क्या था?
ये सवाल किसी एक पत्रकार के नहीं हैं। ये सवाल मीडिया के सम्मान और पारदर्शिता से जुड़े हैं।
UPT20 को सफल बनाने में खिलाड़ियों के साथ-साथ मीडिया की भी बड़ी भूमिका है। ऐसे में अगर मीडिया के बीच ही कथित तौर पर अंतर दिखाई दे, तो यह पूरे आयोजन की व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
अब नजरें UPCA और UPT20 प्रबंधन के जवाब पर हैं।
क्योंकि पत्रकार को उपहार नहीं चाहिए…
उसे चाहिए सिर्फ बराबरी का सम्मान।
और जब सम्मान में फर्क दिखाई देने लगे, तो सवाल उठना लाज़िमी है।
UPT20 सीज़न-4 का सबसे बड़ा सवाल शायद मैदान पर नहीं, मैदान के बाहर है—
क्या मीडिया के लिए भी ‘कुछ खास’ और ‘बाकी’ की व्यवस्था है?
