दो दशकों की यात्रा: पृथ्वी दिवस ने बढ़ाई जागरूकता, पर चुनौतियाँ अब भी शेष

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लेखिका-गार्गी सिंह, कक्षा पाँचवीं
बाल भारती पब्लिक स्कूल,सीपत (बिलासपुर)

विश्व पृथ्वी दिवस को मनाते हुए लगभग दो दशक बीत चुके हैं। इस दौरान पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता निश्चित रूप से बढ़ी है, किंतु धरती को सुरक्षित बनाने की दिशा में अभी भी निरंतर प्रयासों की आवश्यकता है।
अपने आसपास के परिवेश का अवलोकन करने पर यह स्पष्ट होता है कि लोग अब पेड़ लगाने, स्वच्छता बनाए रखने और प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने का प्रयास कर रहे हैं। इसके बावजूद प्लास्टिक का अत्यधिक उपयोग, बढ़ता प्रदूषण और घटते जल स्रोत आज भी गंभीर चिंता के विषय बने हुए हैं।
एक छात्रा के रूप में मेरा मानना है कि छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव ला सकते हैं। यदि हम सभी पानी और बिजली की बचत करें, अधिक से अधिक पेड़ लगाएँ और अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखें, तो हम अपनी पृथ्वी को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
इन वर्षों की यात्रा हमें यह सिखाती है कि केवल एक दिन मनाने से परिवर्तन संभव नहीं है, बल्कि हमें अपनी दैनिक आदतों में सुधार लाकर पर्यावरण संरक्षण को जीवन का हिस्सा बनाना होगा। यही हमारी सच्ची जिम्मेदारी है और आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा कर्तव्य भी।

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