वाराणसी : मानवाधिकार दिवस पर बच्चों को कर्तव्यों का पढ़ाया पाठ

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वाराणसी : रोहनिया
शुक्रवार को वाराणसी के रोहनिया काशीपुर क्षेत्र के एक निजी विद्यालय में विश्व मानवाधिकार दिवस के अवसर पर मानवाधिकार CWA के वाराणसी महानगर अध्यक्ष सहदेव प्रताप सिंह के नेतृत्व में विश्व मानवाधिकार दिवस कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आराजी लाइन ब्लॉक के ब्लाक प्रमुख महेंद्र पटेल रहे। कार्यक्रम की शुरुआत चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) बिपिन रावत के हेलिकॉप्टर क्रैश में शाहिद भारत देश के वीर जवानों को याद कर शहादत देने के उपरांत कार्यक्रम में सम्मिलित सभी लोगों को संबोधित करते हुए सगठन के महानगर अध्यक्ष सहदेव प्रताप सिंह ने बच्चों को विश्व मानवाधिकार दिवस के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि, द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान सम्पूर्ण विश्व में मानव समाज एक बहुत ही बुरे दौर से गुजर रहा था। यह वो समय था जब मानव सभ्यता और मानवता दोनों ही शर्मसार हो रही थीं। क्योंकि युद्ध समाप्त होने के बाद भी गरीब और असहायों पर अत्याचार, जुल्म, हिंसा और भेदभाव जारी थे। यही वो परिस्थितियाँ थीं जब संयुक्त राष्ट्र ने प्रत्येक मानव के मनुष्य होने के उसके मूलभूत अधिकारों की जरूरत को समझा और यूनीवर्सल मानव अधिकारों की रूपरेखा को ड्राफ्ट किया जिसे 10 दिसम्बर 1948 को अपनाया गया। इसमें मानव समुदाय के लिए राष्ट्रीयता, लिंग, धर्म, भाषा और अन्य किसी आधार पर बिना भेदभाव किए उनके बुनियादी अधिकार सुनिश्चित किए गए। इस ड्राफ्ट को औपचारिक रूप से 4 दिसंबर 1950 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के पूर्ण अधिवेशन में लाया गया। तब इसे सभी देशों और संगठनों को अपने अपने तरीके से मनाने के लिए कहा गया। भारत में 28 सितंबर 1993 से मानवाधिकार कानून लागू किया गया और 12 अक्टूबर 1993 को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का गठन हुआ।मानवाधिकारों के अन्तर्गत आने वाले अधिकांश अधिकार हमारे वो मौलिक अधिकार हैं जो हमारा संविधान हमें देता है, बल्कि हर देश का संविधान अपने नागरिकों को देता है। इसी के साथ मानवाधिकार CWA के महासचिव अभिषेक कुमार ने कहा कि आज के समय मे अधिक खेदजनक यह है कि जिस मानव को ध्यान में रख कर इन अधिकारों की रूपरेखा तय की गई थी उस मानव की कहीं बात नहीं होती और जिन अधिकारों को दिलाने के लिए इस आयोग का गठन हुआ था उन अधिकारों का कोई नामोनिशां नहीं दिखाई देता। जैसे मानवाधिकारों के अंतर्गत हर मानव को प्रदूषण मुक्त वातावरण में जीने का अधिकार है लेकिन अपने ही देश में हम देख रहे हैं कि देश की राजधानी समेत न जाने कितने ही शहरों में रहने वाले लोग इस कदर प्रदूषित वातावरण में रहने के लिए विवश हैं कि अब उनके स्वास्थ्य पर ही बन आई है।मानवाधिकार आयोग यह सुनिश्चित करता है कि हर व्यक्ति को भोजन मिले, कहा जा सकता है कि इन अधिकारों की फेहरिस्त में मानव के भोजन के अधिकार को प्रमुखता से रखा गया है। लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि भारत में अब भी 20 करोड़ से ज्यादा लोगों को भूखे पेट सोना पड़ता है। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद संस्था के महानगर अध्यक्ष सहदेव प्रताप सिंह और महा सचिव अभिषेक कुमार के माध्यम से स्कूल के सभी बच्चों में मिठाईयां और कॉपी पेन का वितरण किया गया। इस के साथ स्कूल के मैदान में जगह जगह पर वृक्षारोपण किया गया। कार्यक्रम में मानवाधिकार CWA संस्था के महानगर अध्यक्ष सहदेव प्रताप सिंह, महानगर सचिव अभिषेक कुमार, जिला अध्यक्ष संजय यादव, जिला प्रभारी विकास सिंह, राजेश कुशवाहा के अलावा आदि संगठन के लोग मौजूद रहे।

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